मध्य प्रदेश: बड़वानी में काम में लापरवाही, सीएम मोहन यादव ने 7 अधिकारियों को किया निलंबित
बड़वानी: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने में देरी और लापरवाही बरतने के आरोप में सात अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया है। यह बड़ी कार्रवाई…
बड़वानी: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने में देरी और लापरवाही बरतने के आरोप में सात अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया है। यह बड़ी कार्रवाई बड़वानी में शुक्रवार को आयोजित 'मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान' के दौरान की गई, जहां मुख्यमंत्री सीधे शिकायतकर्ताओं से संवाद कर रहे थे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सीएम ने जमीन के नामांतरण से लेकर आवास योजना और कल्याणकारी भुगतानों में देरी के मामलों की समीक्षा के बाद यह सख्त कदम उठाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को उनके अधिकार के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने चाहिए और शिकायतों के निपटारे में किसी भी तरह की अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ज़मीन नामांतरण में 6 साल की देरी
राजपुर तहसील के एक शिकायतकर्ता अजय-लाल ने बताया कि पिता की मृत्यु के बाद 2016 में उन्होंने ज़मीन के नामांतरण के लिए आवेदन दिया था, लेकिन यह प्रक्रिया 2022 में जाकर पूरी हुई। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के भुगतान में भी देरी की शिकायत की गई थी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएम यादव ने तत्कालीन तहसीलदार आशा परमार (जो अब धार में डिप्टी कलेक्टर हैं), पटवारी मांगीलाल नरगावे और ललित बोरसे को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्देश दिया।
घर बनने के बाद मिली आवास योजना की पहली किश्त
एक अन्य मामले में, रूपेश शर्मा नामक व्यक्ति ने बताया कि उन्होंने 2019 में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए आवेदन किया था। जियो-टैगिंग 2022 में हुई और किश्त की प्रक्रिया 2023 में शुरू हुई, लेकिन उन्हें पहली किश्त 10 अगस्त को तब मिली, जब वह अपना घर पहले ही बना चुके थे। इस पर मुख्यमंत्री ने दो पूर्व मुख्य नगर पालिका अधिकारियों, मायाराम सोलंकी और जगदीश धाकड़, के साथ-साथ सहायक इंजीनियर राजू डावर को भी निलंबित कर दिया। इसके अलावा, इंदौर में शहरी प्रशासन के संयुक्त निदेशक एसके सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
अन्य योजनाओं में भी लापरवाही
लापरवाही का एक और मामला 'संबल योजना' से जुड़ा था, जिसमें एक आवेदक को अप्रैल 2019 में आवेदन करने के बावजूद अंतिम संस्कार और अनुग्रह राशि नहीं मिली थी। जांच में पता चला कि प्राथमिकता सूची में नीचे के 16 लाभार्थियों को भुगतान पहले ही कर दिया गया था। इस पर सीएम ने जनपद पंचायत के तत्कालीन सीईओ सौरभ सिंह ठाकुर को भी निलंबित करने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने 'मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना' और पशुधन बीमा के तहत भुगतान में हो रही देरी की भी जांच के आदेश दिए हैं।
इनपुट: IANS



