महादेव ऐप केस: CBI ने 11 नई चार्जशीट दायर कीं, मुख्य सरगनाओं पर शिकंजा और कसा
देश के सबसे बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी घोटालों में से एक, महादेव ऐप मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जांच एजेंसी ने इस मामले में 11 नई चार्ज
देश के सबसे बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी घोटालों में से एक, महादेव ऐप मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जांच एजेंसी ने इस मामले में 11 नई चार्जशीट दाखिल की हैं, जिससे विदेश से संचालित हो रहे इस करोड़ों रुपए के अवैध नेटवर्क पर शिकंजा और कस गया है।
इन नई चार्जशीट में कुल 72 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें मामले के मुख्य सरगना सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ अतिरिक्त सबूत पेश किए गए हैं, जिनके विरुद्ध पहले ही आरोपपत्र दाखिल हो चुका है। एजेंसी ने इन दोनों समेत चार मुख्य आरोपियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी करवाया है और उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
अलग-अलग मामलों में दाखिल हुए आरोपपत्र
CBI ने दो अलग-अलग मामलों में ये चार्जशीट दायर की हैं। एक मामले में छह आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं, जिनमें आशीष दास, रोहित गुलाटी, विकास छपारिया, अनिल धम्मनी, विशाल आहूजा और धीरज आहूजा समेत छह लोगों को आरोपी बनाया गया है। इन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और IPC की धोखाधड़ी, जालसाजी व आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं।
वहीं, दूसरे मामले में पांच और आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं, जिनमें सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और सिंडिकेट से जुड़े अन्य सदस्यों समेत कुल 66 लोगों के नाम हैं। इन पर IPC और छत्तीसगढ़ जुआ निषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
जांच के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने सोशल मीडिया के जरिए अपने ऐप का जमकर प्रचार किया, जिससे लाखों लोग इसके झांसे में आ गए। यह गिरोह देश के कई राज्यों में अवैध सट्टेबाजी के पैनल चलाता था, जिसके जरिए करोड़ों रुपए की अवैध कमाई की जाती थी।
आरोप है कि इस पैसे को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए गुप्त बैंक खातों से विदेश भेजा जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि इस अवैध कमाई का एक हिस्सा कुछ सरकारी कर्मचारियों को 'प्रोटेक्शन मनी' के तौर पर भी दिया जाता था। नेटवर्क के प्रमोटर और कई मुख्य सहयोगी कुछ साल पहले ही भारत छोड़कर विदेश जा चुके थे और माना जाता है कि वे पश्चिम एशिया के कुछ देशों से यह नेटवर्क चला रहे थे।
CBI ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे नेटवर्क की जांच अभी जारी है और कथित राजनीतिक व नौकरशाही संरक्षण की भी पड़ताल की जा रही है। एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले महीनों में और भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं।
इनपुट: IANS



