मंगलवार, 25 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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राजस्थान की आर्थिक सेहत पर CAG की रिपोर्ट: सरकारें बदलीं, पर वित्तीय घाटे की चुनौती बरकरार

राजस्थान में पिछले एक दशक में सरकारें तो बदलती रहीं, लेकिन राज्य की वित्तीय स्थिति लगातार दबाव में बनी हुई है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक हालिया रिपोर्ट ने राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर…

राजस्थान की आर्थिक सेहत पर CAG की रिपोर्ट: सरकारें बदलीं, पर वित्तीय घाटे की चुनौती बरकरार
(फोटो: IANS)

राजस्थान में पिछले एक दशक में सरकारें तो बदलती रहीं, लेकिन राज्य की वित्तीय स्थिति लगातार दबाव में बनी हुई है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक हालिया रिपोर्ट ने राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर चिंताएं जाहिर की हैं। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, रिपोर्ट में बताया गया है कि वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत से लेकर मौजूदा भजन लाल शर्मा सरकार तक, अधिकांश समय राजकोषीय घाटा तय सीमा को पार करता रहा है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, बजट अनुमानों और वास्तविक आंकड़ों, दोनों में ही घाटा निर्धारित मानकों से अधिक रहा है। 'फिस्कल रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट' (FRBM) फ्रेमवर्क का लक्ष्य राजस्व घाटे को खत्म करना और राजकोषीय घाटे को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 3 प्रतिशत तक सीमित करना था। हालांकि, राजस्थान इस लक्ष्य को बार-बार हासिल करने में विफल रहा है।

घाटे के आंकड़े और उतार-चढ़ाव

CAG के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2015-16 और 2024-25 के बीच राजकोषीय घाटे में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। यह 2015-16 में 9.25% के उच्च स्तर पर था, जो 2017-18 में घटकर 3.04% पर आ गया। लेकिन इसके बाद यह लगातार 3% की सीमा से ऊपर बना रहा। 2020-21 में यह बढ़कर 5.83% हो गया। 2023-24 में यह 4.31% और 2024-25 में 4.25% दर्ज किया गया। सरकार के मध्यम-अवधि के अनुमानों के अनुसार, आने वाले वर्षों में भी इसके 3% से ऊपर बने रहने की आशंका है।

राजस्व प्रबंधन और कर्ज पर निर्भरता

रिपोर्ट में राजस्व प्रबंधन की कमियों को भी उजागर किया गया है। हालांकि राजस्व प्राप्तियों में वृद्धि हुई है, लेकिन वे अक्सर बजट अनुमानों से कम रहीं। इसके चलते राज्य केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड और सहायता पर काफी हद तक निर्भर रहा है। रिपोर्ट बताती है कि राजस्थान ने केवल 2011-12 और 2012-13 में ही राजस्व अधिशेष (Revenue Surplus) हासिल किया था। इसके बाद से राज्य लगातार राजस्व घाटे की स्थिति में है, जिससे अपने खर्चों को पूरा करने के लिए उसकी कर्ज पर निर्भरता बढ़ गई है।

वित्तीय सुधार के लिए CAG के सुझाव

राज्य की वित्तीय सेहत को पटरी पर लाने के लिए CAG ने कई ठोस सुझाव दिए हैं। इनमें प्रमुख रूप से अपने कर राजस्व के अनुमानों की नियमित तिमाही समीक्षा करना, बजट अनुमानों की विभाग-वार जांच करना और राज्य के स्वयं के कर राजस्व और GSDP के अनुपात को बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करना शामिल है।

अन्य प्रमुख सिफारिशें:

  • पुरानी पेंशन योजना (OPS) के भुगतान के लिए एक अलग फंड का निर्माण।
  • विभाग-वार अनुदानों की निगरानी के लिए एक डैशबोर्ड विकसित करना।
  • ब्याज का बोझ कम करने के लिए राज्य के कर्ज का पुनर्गठन करना।
  • यह सुनिश्चित करना कि उधार ली गई धनराशि का उपयोग राजस्व खर्च के बजाय पूंजीगत संपत्ति बनाने में हो।

CAG की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि यह चुनौती किसी एक सरकार की नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही वित्तीय प्रबंधन की खामियों का नतीजा है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजस्थान डेस्क

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