भारतीय शेयर बाज़ार पर लौटा विदेशी ब्रोकरेज BofA का भरोसा, निफ्टी के 26,200 तक जाने का अनुमान
करीब दो साल तक भारतीय शेयर बाज़ारों को लेकर सतर्कता बरतने के बाद, अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) सिक्योरिटीज ने अब अपना नजरिया बदला है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, BofA…
करीब दो साल तक भारतीय शेयर बाज़ारों को लेकर सतर्कता बरतने के बाद, अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) सिक्योरिटीज ने अब अपना नजरिया बदला है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, BofA ने भारतीय इक्विटी बाज़ारों पर अपना रुख 'सकारात्मक' कर लिया है और दिसंबर 2026 तक निफ्टी के 26,200 के स्तर पर पहुंचने का अनुमान जताया है, जो मौजूदा स्तर से लगभग 12% की संभावित बढ़त दर्शाता है।
BofA ने अपनी नवीनतम रणनीति रिपोर्ट में बताया है कि अगस्त 2024 से वे भारतीय बाज़ारों को लेकर सतर्क थे। उन्होंने आठ प्रमुख जोखिमों की पहचान की थी, जिनके कारण बाज़ार में अस्थिरता बनी रह सकती थी। अब ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि इन आठ में से पांच जोखिम या तो घटित हो चुके हैं या बाज़ार ने उन्हें अपनी कीमतों में पहले ही शामिल कर लिया है। इसी आकलन के आधार पर कंपनी ने अपना दृष्टिकोण बदला है।
चिंता के वो बादल जो अब छँट गए
जिन जोखिमों को BofA अब कमतर आंक रहा है, उनमें कच्चे तेल की कीमतें, रुपए की चाल और मानसून की स्थिति शामिल हैं।
- कच्चा तेल: पहले कच्चे तेल का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाना एक बड़ा जोखिम माना गया था। हालांकि, रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले सात महीनों में कीमतें सात बार 100 डॉलर के स्तर से नीचे आई हैं। BofA का अनुमान है कि 2026 की चौथी तिमाही तक कच्चा तेल 81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहेगा।
- रुपया: पहले रुपए को लेकर चिंता थी, लेकिन हाल में देश में आए करीब 136 अरब डॉलर के पूंजी प्रवाह से भारतीय मुद्रा को मज़बूती मिलनी चाहिए।
- मानसून: कमजोर मानसून को एक खतरे के तौर पर देखा जा रहा था। फिलहाल बारिश की कमी 13% है, जो BofA के 15% के सबसे बुरे अनुमान के काफी करीब है, यानी यह जोखिम भी काफी हद तक सामने आ चुका है।
इसके अलावा, ब्रोकरेज का यह भी मानना है कि एल्यूमीनियम और तांबे जैसी धातुओं की कीमतों में अब और तेज़ उछाल की संभावना सीमित है।
बाज़ार के लिए बाकी बचे तीन जोखिम
BofA के अनुसार, तीन जोखिम अभी भी बने हुए हैं, जिनके कारण निगेटिव परिदृश्य में निफ्टी-50 में 7% तक की गिरावट आ सकती है। ये जोखिम अक्टूबर 2026 तक अपने चरम पर हो सकते हैं, जिसके बाद नवंबर से बाज़ार में सुधार की उम्मीद है।
1. प्राथमिक बाज़ार में पूंजी उगाही: सितंबर से दिसंबर के बीच नए इश्यू (IPO, FPO आदि) के ज़रिए करीब 30 अरब डॉलर जुटाए जा सकते हैं। इससे बाज़ार से लिक्विडिटी खिंच सकती है।
2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें: BofA का अनुमान है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कुल 75 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है, जबकि बाज़ार अभी सिर्फ 35 आधार अंकों की बढ़ोतरी मानकर चल रहा है।
3. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): यह एक दीर्घकालिक जोखिम है। BofA का कहना है कि AI से होने वाले बदलावों का भारत के रोज़गार बाज़ार पर लंबा असर पड़ सकता है, जिस पर निवेशकों को नज़र रखनी होगी।
इनपुट: IANS



