भारत की कूटनीतिक सफलता: विदेश मंत्री ने कहा- ब्रिक्स में गहरे मतभेदों के बावजूद आम सहमति बनी
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि सफल ब्रिक्स समिट ने गहरे भू-राजनीतिक मतभेदों के बीच भी विभिन्न देशों में आम सहमति बनाने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट…
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि सफल ब्रिक्स समिट ने गहरे भू-राजनीतिक मतभेदों के बीच भी विभिन्न देशों में आम सहमति बनाने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस आयोजन को भारत की मजबूत संगठनात्मक क्षमता का प्रमाण भी बताया। जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह शिखर सम्मेलन उन भविष्यवाणियों के बावजूद सफल रहा, जिनमें इसके विफल होने की आशंका जताई गई थी।
जयशंकर के मुताबिक, इस समिट ने ऐसे नेताओं के बीच भी एक खुली और सहज बातचीत का माहौल तैयार किया, जो शायद अलग परिस्थितियों में कभी नहीं मिल पाते। उन्होंने कहा कि सुधार और लचीलेपन जैसे विषयों ने ब्रिक्स सदस्यों को एक साझा मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
व्यापक भागीदारी और अहम मुद्दे
इस शिखर सम्मेलन में कुल 32 प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया। इनमें 11 ब्रिक्स सदस्य देशों के अलावा 10 भागीदार देश, चार क्षेत्रीय संगठन और सात अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे। कई देशों का प्रतिनिधित्व उनके राष्ट्राध्यक्षों ने किया, जिनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, ईरान के राष्ट्रपति, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद, संयुक्त अरब अमीरात के क्राउन प्रिंस और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी शामिल थे।
सम्मेलन का एजेंडा मुख्य रूप से आर्थिक विकास, प्रौद्योगिकी और 'ग्लोबल साउथ' की आवाज को मजबूत करने पर केंद्रित था। विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'बातचीत, कूटनीति और विकास' के संदेश को दुनियाभर में सराहा गया, जिसकी झलक इस समिट में भी दिखी।
आतंकवाद और पश्चिम एशिया पर साझा रुख
वैश्विक तनावों के बीच, ब्रिक्स पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व संघर्ष पर आम सहमति बनाने में सफल रहा। सदस्यों ने शांति, सुरक्षा और स्थिरता की अपील करते हुए निर्बाध वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही, नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया।
एस. जयशंकर ने आतंकवाद पर बनी आम सहमति को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स ने सीमा-पार आतंकवाद सहित इसके सभी रूपों की निंदा की। समूह ने 22 अप्रैल, 2025 के पहलगाम आतंकी हमले को स्पष्ट रूप से अस्वीकार्य माना और आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' तथा दोहरे मापदंडों को खारिज करने का आह्वान किया।
इनपुट: IANS



