सोमवार, 14 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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आंध्र प्रदेश शिक्षक भर्ती घोटाला: जगन मोहन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू से पूछा - 'क्या आप ज़िम्मेदारी लेंगे?'

आंध्र प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू…

आंध्र प्रदेश शिक्षक भर्ती घोटाला: जगन मोहन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू से पूछा - 'क्या आप ज़िम्मेदारी लेंगे?'
(फोटो: IANS)

आंध्र प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जगन ने ज़िला चयन समिति (DSC) के माध्यम से हुई भर्तियों में कथित धांधली को लेकर नायडू सरकार की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी नवीनतम पोस्ट में जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि जब परीक्षाओं की विश्वसनीयता खत्म हो जाती है, तो उम्मीदवारों के सपने भी टूट जाते हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि लाखों अभ्यर्थी निष्पक्ष अवसर की उम्मीद में अपने जीवन के कीमती साल और परिवार की गाढ़ी कमाई दांव पर लगा देते हैं।

भर्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल

जगन ने लिखा, "जब व्यवस्था उन्हें निराश करती है तो इसका असर केवल नतीजों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया से उनका भरोसा टूट जाता है और उनमें निराशा पैदा होती है।" उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री नायडू को संबोधित करते हुए सवाल किया, “निष्पक्षता कोई विकल्प नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। क्या आपको नहीं लगता कि उनकी मेहनत निष्पक्षता और भविष्य में जवाबदेही की हकदार है? क्या आप डीएससी में मौजूदा घोटाले की जिम्मेदारी लेंगे?”

वाईएसआरसीपी प्रमुख पिछले कुछ समय से इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं। उन्होंने कथित घोटाले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से गहन जांच कराने और शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के इस्तीफे की मांग की है, जो मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के बेटे हैं।

एक अभ्यर्थी का दिया उदाहरण

अपनी बात को पुष्ट करने के लिए, जगन ने एक विशिष्ट मामले का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि कैसे एक अभ्यर्थी को कथित तौर पर 65 टीईटी अंकों के साथ पद आवंटित कर दिया गया और वह सात चरणों की सत्यापन प्रक्रिया से भी गुज़रा। हालांकि, बाद में ज़िला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने उसी अभ्यर्थी को अयोग्य घोषित कर दिया।

इस पर जगन ने सवाल उठाया, "अगर अभ्यर्थी सात चरणों की सत्यापन प्रक्रिया से गुजरा था तो वास्तव में उन सात चरणों में क्या सत्यापित किया गया था?" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस अभ्यर्थी को नौकरी मिली, उसे खुद इस बात की जानकारी नहीं थी। जगन ने पूछा कि क्या ऐसी प्रक्रिया को किसी भी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी कहा जा सकता है और क्या मुख्यमंत्री इसकी नैतिक ज़िम्मेदारी नहीं लेंगे?

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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