सोमवार, 14 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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दुष्कर्म मामला: तरुण तेजपाल ने गोवा की अदालत में सरेंडर किया, भेजे गए कोलवाले जेल

पत्रकारिता जगत के चर्चित चेहरे और तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल ने सोमवार को गोवा की एक अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद उन्हें उत्तरी गोवा की कोलवाले सेंट्रल जेल भेज दिया गया…

दुष्कर्म मामला: तरुण तेजपाल ने गोवा की अदालत में सरेंडर किया, भेजे गए कोलवाले जेल
(फोटो: IANS)

पत्रकारिता जगत के चर्चित चेहरे और तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल ने सोमवार को गोवा की एक अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद उन्हें उत्तरी गोवा की कोलवाले सेंट्रल जेल भेज दिया गया। यह घटनाक्रम 2013 के एक दुष्कर्म मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा उन्हें दोषी ठहराए जाने और 10 साल की सजा सुनाए जाने के कुछ हफ्तों बाद सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को 62 वर्षीय तेजपाल को दो हफ्तों के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया था।

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यह मामला नवंबर 2013 का है, जब तेजपाल की एक जूनियर सहकर्मी ने आरोप लगाया था कि गोवा के एक लक्जरी होटल में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने लिफ्ट के अंदर उसका यौन उत्पीड़न किया। गोवा पुलिस ने इस मामले में बलात्कार सहित कई धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी और नवंबर 2013 में ही स्थानीय अदालत द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि, जुलाई 2014 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिल गई थी।

कानूनी प्रक्रिया और अदालती दांव-पेंच

इस मामले में कानूनी लड़ाई काफी लंबी चली। मई 2021 में एक सेशंस कोर्ट ने तेजपाल को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे मामले को साबित करने में विफल रहा। लेकिन गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। 6 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत बलात्कार और अन्य अपराधों का दोषी पाया और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

सजा के बाद तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत की मांग की थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। जस्टिस आलोक अराधे की एकल-न्यायाधीश पीठ ने स्पष्ट किया था कि उनकी अपील पर सुनवाई तभी होगी जब वे सरेंडर कर देंगे। अदालत ने 22 सितंबर या उससे पहले सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसी निर्देश का पालन करते हुए तेजपाल ने मापुसा की अतिरिक्त सत्र अदालत में आत्मसमर्पण किया।

सुप्रीम कोर्ट में दलीलें

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तेजपाल के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया था कि तेजपाल पूरी कार्यवाही के दौरान जमानत पर रहे हैं और अब एक वरिष्ठ नागरिक हैं। वहीं, गोवा सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जब तक तेजपाल सरेंडर नहीं करते, उनकी अपील पर सुनवाई नहीं हो सकती। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तेजपाल की याचिका के खिलाफ फैसला सुनाया और उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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