सोमवार, 14 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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रामगढ़ प्रदूषण मामला: झारखंड हाईकोर्ट का सख़्त आदेश, उद्योगों का होगा औचक निरीक्षण

झारखंड के रामगढ़ जिले में औद्योगिक प्रदूषण के एक मामले में उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कई अहम निर्देश जारी किए…

रामगढ़ प्रदूषण मामला: झारखंड हाईकोर्ट का सख़्त आदेश, उद्योगों का होगा औचक निरीक्षण
(फोटो: IANS)

झारखंड के रामगढ़ जिले में औद्योगिक प्रदूषण के एक मामले में उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कई अहम निर्देश जारी किए हैं, जिनमें औद्योगिक इकाइयों के नियमित और औचक निरीक्षण भी शामिल हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह याचिका राम किशोर नामक व्यक्ति ने दायर की थी।

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याचिका में रामगढ़ स्थित दो कंपनियों - बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग लिमिटेड और दयाल स्टील लिमिटेड - पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन पर चिमनियों के ज़रिए धुआं और धूल फैलाने के साथ-साथ दामोदर नदी व अन्य जल स्रोतों को प्रदूषित करने का आरोप था। इसी मामले का निपटारा करते हुए चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्वच्छ पर्यावरण को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग बताया।

औचक निरीक्षण और कार्रवाई के निर्देश

अदालत ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के हजारीबाग क्षेत्रीय अधिकारी को आदेश दिया है कि वे इन दोनों औद्योगिक इकाइयों का साल में कम से कम दो बार निरीक्षण करें। खास तौर पर यह भी कहा गया है कि इनमें से एक निरीक्षण बिना किसी पूर्व सूचना के किया जाना चाहिए ताकि प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की वास्तविक स्थिति का पता चल सके।

कोर्ट ने उत्सर्जन निगरानी पर भी सख्त निर्देश दिए हैं। यदि किसी उद्योग का ‘कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम’ 48 घंटे से ज़्यादा समय तक तय सीमा से अधिक उत्सर्जन दिखाता है, तो बोर्ड को सात दिनों के भीतर संबंधित उद्योग को कारण बताओ नोटिस जारी करना होगा।

जल प्रदूषण की भी होगी जांच

जल प्रदूषण की स्थिति का आकलन करने के लिए भी समय-सीमा तय की गई है। अदालत ने विवा इंटरनेशनल स्कूल के पास और दामोदर नदी के अपस्ट्रीम व डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों से पानी के नमूने लेने का निर्देश दिया है। इन नमूनों को तीन महीने के भीतर किसी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा और इसकी रिपोर्ट रामगढ़ के उपायुक्त को सौंपी जाएगी।

इसके अलावा, दोनों कंपनियों को मिली पर्यावरणीय स्वीकृतियों, कंसेंट टू एस्टेब्लिश (CTE) और कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) की भी विस्तृत समीक्षा की जाएगी। अगले दो महीनों में इन दस्तावेजों की जांच कर एक रिकॉर्ड तैयार करने को कहा गया है। अगर कोई अनुमति समाप्त पाई जाती है, तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को चार महीने में अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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