सोमवार, 14 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश

बरेली में देसी गिर गायों की नस्ल सुधारने की बड़ी पहल, ब्राजील और तंजानिया के वैज्ञानिक भी हुए शामिल

उत्तर प्रदेश के बरेली में देसी गिर गायों की दूध उत्पादन क्षमता बढ़ाने और उनकी नस्ल सुधारने के लिए एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। इसे भ्रूण प्रत्यारोपण (एम्ब्रियो ट्रांसफर) और जीनोमिक्स…

बरेली में देसी गिर गायों की नस्ल सुधारने की बड़ी पहल, ब्राजील और तंजानिया के वैज्ञानिक भी हुए शामिल
(फोटो: IANS)

उत्तर प्रदेश के बरेली में देसी गिर गायों की दूध उत्पादन क्षमता बढ़ाने और उनकी नस्ल सुधारने के लिए एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। इसे भ्रूण प्रत्यारोपण (एम्ब्रियो ट्रांसफर) और जीनोमिक्स पर आधारित दुनिया का पहला कार्यक्रम बताया जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहल में ब्राजील और तंजानिया के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ भी हिस्सा ले रहे हैं। इसका आयोजन बीएल एग्रो और लीड्स जेनेटिक्स द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है।

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इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य देसी गायों की गुणवत्ता में सुधार कर उनकी संख्या बढ़ाना है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो और उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाला दूध मिल सके। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह और वन मंत्री अरुण सक्सेना भी मौजूद रहे।

किसानों और उपभोक्ताओं को फायदा

वन मंत्री अरुण सक्सेना ने इस पहल को किसानों और आम जनता दोनों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, "अगर गाय की नस्ल सुधरेगी, हमारा गाय का दूध बढ़ेगा, तो जो गाय दो-चार किलो दूध देती है, वो 12-14 किलो दूध देगी, तो किसानों की आय बढ़ेगी।" उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस आधुनिक तकनीक को छोटे किसानों तक पहुंचाने के लिए योजना बनाएगी।

लीड्स जेनेटिक्स के निदेशक आशीष खंडेलवाल ने किसानों को होने वाले आर्थिक लाभ का गणित समझाते हुए कहा कि अगर 4-5 लीटर दूध देने वाली गाय 40 लीटर दूध देने लगे, तो 60 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से किसान की आमदनी 240 रुपए से बढ़कर 2400 रुपए प्रतिदिन हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना पर अब तक लगभग 200 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं और अगले पांच वर्षों में 1500 करोड़ रुपए और खर्च करने की योजना है।

'स्वस्थ भारत के लिए महत्वपूर्ण कदम'

मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्वस्थ भारत' के संकल्प से जोड़ा। उन्होंने कहा, "और ज्यादा दूध उत्पादन होगा और जितनी दूध की आवश्यकता है उतना दूध उपलब्ध न होने के कारण जो नकली तरीके से पनीर और अन्य चीजें बनाई जाती हैं, उसमें कमी आएगी। स्वस्थ भारत बनाने का जो प्रधानमंत्री का संकल्प है, 2047 तक विकसित भारत और साथ में स्वस्थ भारत, उसमें इस प्रकार के कार्यक्रम की भी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।"

यह पूछे जाने पर कि क्या मध्य प्रदेश भी इस तकनीक को अपनाएगा, उन्होंने कहा कि उनका आने का उद्देश्य यही समझना था ताकि रीवा के गोवंश वन्यविहार में नस्ल सुधार का काम भी किया जा सके।

देसी गाय का दूध 'अमृत'

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने इसे दुनिया का पहला ऐसा कार्यक्रम बताते हुए कहा, "भ्रूण स्थानांतरण से देसी गाय में नस्ल सुधार होगी। देसी गाय का दूध अमृत है।" उन्होंने कहा कि इस पहल से किसानों की आय बढ़ेगी और वे गायों को छोड़ने पर मजबूर नहीं होंगे। वहीं, बीएल एग्रो के चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल ने कहा कि जब दूध देने की क्षमता बढ़ेगी तो किसान की स्थिति में बड़ा बदलाव आएगा और देश सशक्त होगा।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तर प्रदेश डेस्क

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