शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

‘वंदे मातरम’ पर कर्नाटक सरकार के आदेश को भाजपा ने बताया ‘गैर-कानूनी’, कांग्रेस पर साधा निशाना

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के एक आदेश को लेकर उस पर तीखा हमला बोला है, जिसमें सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो छंद गाने का निर्देश दिया गया है…

‘वंदे मातरम’ पर कर्नाटक सरकार के आदेश को भाजपा ने बताया ‘गैर-कानूनी’, कांग्रेस पर साधा निशाना
(फोटो: IANS)

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के एक आदेश को लेकर उस पर तीखा हमला बोला है, जिसमें सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो छंद गाने का निर्देश दिया गया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने गुरुवार को कहा कि यह आदेश संसद द्वारा पारित कानून का सीधा उल्लंघन है, जो आधिकारिक समारोहों में बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखित संपूर्ण राष्ट्रगीत के गायन को अनिवार्य करता है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, त्रिवेदी ने कांग्रेस सरकार के इस कदम को न केवल ‘गैर-कानूनी और हास्यास्पद’ बताया, बल्कि इसे पार्टी की उस मानसिकता का प्रतीक भी कहा जिसके तहत वह ‘संविधान को अपनी जेब में रखना चाहती है’। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश का हर नागरिक जानता है कि कोई भी राज्य विधानसभा, संसद के कानून के खिलाफ जाकर कोई नियम नहीं बना सकती।

सहयोगी दलों से अलगाव और चरमपंथी ताकतों का आरोप

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि ‘वंदे मातरम’ के मुद्दे पर कांग्रेस अपने ही सहयोगी दलों के बीच अलग-थलग पड़ गई है और सिर्फ मुस्लिम लीग ही उसके समर्थन में खड़ी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राष्ट्रगीत पर सवाल खड़ा करना चरमपंथी और अलगाववादी ताकतों के सामने घुटने टेकने जैसा नहीं है? त्रिवेदी ने यह भी याद दिलाया कि कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे विपक्षी शासित राज्यों के राज्य-गीतों में भी मातृभूमि को नमन करने का उल्लेख है।

इस संदर्भ में, उन्होंने जम्मू-कश्मीर के एक हालिया वाकये का जिक्र किया, जहां कांग्रेस ने अपने सहयोगी दल नेशनल कॉन्फ्रेंस की आलोचना की थी। यह आलोचना एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के उद्घाटन पर ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाए जाने को लेकर थी। इस पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया था कि यह अब एक कानूनी आवश्यकता है और इसका पालन करना अनिवार्य है।

एसडीपीआई से संबंधों पर भी उठाए सवाल

त्रिवेदी ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की कथित राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के साथ कांग्रेस के संबंधों पर भी निशाना साधा। उन्होंने एसडीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव इलियास मुहम्मद थुम्बे की उस टिप्पणी का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों में अल्पसंख्यक वोटों का बंटवारा रोकने के लिए कांग्रेस के साथ एक ‘समझ’ होने की बात कही थी।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि हालांकि कांग्रेस ने इससे इनकार किया है, लेकिन 2023 के चुनावों में एसडीपीआई के रवैये से यह शक और गहराता है। उन्होंने बताया कि एसडीपीआई ने पहले 100, फिर 54 और अंत में सिर्फ 16 सीटों पर चुनाव लड़ा और सभी पर उनकी जमानत जब्त हो गई, जिससे दोनों दलों के बीच एक गुप्त चुनावी समझ की आशंका को बल मिलता है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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