बांग्लादेश में खसरा: 5 और बच्चों की मौत, इलाज के खर्च से कर्ज में डूब रहे हैं परिवार
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 5 और बच्चों की मौत हो गई है, जिससे इस बीमारी से जान गंवाने वालों की कुल संख्या 854 पर पहुंच…
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 5 और बच्चों की मौत हो गई है, जिससे इस बीमारी से जान गंवाने वालों की कुल संख्या 854 पर पहुंच गई है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) द्वारा बुधवार सुबह जारी आंकड़ों में इन नई मौतों को संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है।
इन ताजा आंकड़ों के साथ, खसरे के कारण हुई कुल मौतों में से 96 की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 758 मौतें अभी भी संदिग्ध मानी जा रही हैं। बीते 24 घंटों में 959 नए संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिससे कुल संदिग्ध मामलों का आंकड़ा 1,32,905 हो गया है। इसी दौरान 124 नए पुष्ट मामले भी दर्ज हुए, और अब तक कुल 16,655 मामलों की पुष्टि हो चुकी है।
बीमारी का आर्थिक बोझ
खसरे का कहर केवल स्वास्थ्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ भी डाल रहा है। बांग्लादेश रेड क्रिसेंट सोसाइटी (BDRCS) और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज (IFRC) की एक संयुक्त रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। देश के 12 सरकारी अस्पतालों में 2,746 परिवारों पर किए गए अध्ययन के अनुसार, हर 10 में से 9 परिवारों को अपने बच्चे के इलाज का खर्च उठाने के लिए कर्ज लेना पड़ा।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 10 में से 6 परिवार अपनी पूरी जमा-पूंजी इलाज में खर्च कर चुके हैं। औसतन, प्रत्येक परिवार ने लगभग 16,000 बांग्लादेशी टका खर्च किए। कई माता-पिता को अपने बीमार बच्चों की देखभाल के लिए काम छोड़ना पड़ा, जिससे उनकी आय बंद हो गई और कुछ को अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा।
विशेषज्ञ की चिंता
सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्तुक हुसैन ने इस स्थिति को "मेडिकल इम्पॉवरिशमेंट" (चिकित्सीय गरीबी) का एक स्पष्ट उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि कम आय वाले परिवारों पर इलाज का यह बोझ बेहद चिंताजनक है। उनके अनुसार, सरकार ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में मुफ्त प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा का वादा किया था, लेकिन खसरे के इस संकट के दौरान इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा, "ऐसे संकट के समय ही लोगों को सरकारी सहायता की सबसे अधिक जरूरत होती है।"
इनपुट: IANS



