असम में बाल विवाह पर बड़ा एक्शन: 5 साल में 11,000 से ज़्यादा गिरफ्तारियाँ, अभियान और तेज़
असम सरकार ने राज्य में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ अपने अभियान को और तेज कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पिछले पांच सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस अवधि में बाल विवाह से…
असम सरकार ने राज्य में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ अपने अभियान को और तेज कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पिछले पांच सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस अवधि में बाल विवाह से जुड़े 12,196 मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 11,196 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। ये आंकड़े इस समस्या की गंभीरता और सरकार की कार्रवाई को दर्शाते हैं।
गुरुवार को राज्य सरकार ने एक विशेष अभियान की घोषणा की, जिसका नाम 'असम में बाल विवाह का अंत' रखा गया है। इस पहल के तहत असम पुलिस अपराधियों पर सख्ती से नकेल कसेगी। सरकार ने 1 नवंबर को इस प्रथा को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में भी चिह्नित किया है।
पुलिस कार्रवाई के साथ सामाजिक हस्तक्षेप
अधिकारियों का कहना है कि यह विशेष अभियान सिर्फ कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य बाल विवाह में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ एक्शन लेना तो है ही, साथ ही सामाजिक हस्तक्षेप के जरिए इस कुप्रथा को जड़ से खत्म करना भी है। सरकार इस अभियान को न्याय सुनिश्चित करने और महिलाओं एवं बच्चों के लिए नए अवसर पैदा करने के अपने व्यापक सामाजिक सुधार एजेंडे से जोड़कर देख रही है।
क्यों ज़रूरी है यह अभियान?
असम के कई हिस्सों में बाल विवाह एक बड़ी सामाजिक चुनौती बनी हुई है। इससे लड़कियों के जीवन पर गंभीर और स्थायी नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। कम उम्र में शादी होने से उनकी शिक्षा अधूरी रह जाती है, कम उम्र में गर्भधारण और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं, और उनके आर्थिक अवसर भी सीमित हो जाते हैं।
इस अभियान का एक बड़ा लक्ष्य यह संदेश देना है कि बाल विवाह की रोकथाम केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और बाल कल्याण का भी एक अभिन्न अंग है। सरकार लगातार लड़कियों की स्कूली शिक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें बेहतर सामाजिक-आर्थिक भविष्य के अवसर देने पर जोर दे रही है। कहा जा रहा है कि यह अभियान 'बोर असम' के संस्थापक चाओलुंग सिउ-का-फा की विरासत से प्रेरित है।
इनपुट: IANS



