गुरूवार, 10 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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बेंगलुरु: CM शिवकुमार के दौरे के बाद बड़ा एक्शन, APMC मार्केट से 19 बाल मजदूर छुड़ाए गए

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के एक औचक दौरे के बाद बेंगलुरु की यशवंतपुर स्थित एपीएमसी मार्केट में बाल मजदूरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस…

बेंगलुरु: CM शिवकुमार के दौरे के बाद बड़ा एक्शन, APMC मार्केट से 19 बाल मजदूर छुड़ाए गए
(फोटो: IANS)

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के एक औचक दौरे के बाद बेंगलुरु की यशवंतपुर स्थित एपीएमसी मार्केट में बाल मजदूरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस और श्रम विभाग की संयुक्त टीमों ने अभियान चलाकर 19 बच्चों को मुक्त कराया है, जिनसे दुकानों में काम लिया जा रहा था।

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यह पूरा मामला मंगलवार को तब सामने आया, जब मुख्यमंत्री शिवकुमार ने एपीएमसी मार्केट का दौरा किया। वहां किसानों, मजदूरों और व्यापारियों से बातचीत के दौरान स्थानीय लोगों ने उनसे शिकायत की कि कुछ दुकानों पर बच्चों से मजदूरी कराई जा रही है। इस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए।

पुलिस और प्रशासन का संयुक्त अभियान

मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही पुलिस उपायुक्त (उत्तरी संभाग) की निगरानी में पांच विशेष टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने एपीएमसी मार्केट में छापेमारी कर 19 बाल मजदूरों को छुड़ाया। छुड़ाए गए बच्चों में सबसे ज्यादा 13 बिहार से हैं, जिनमें 12 लड़के और एक लड़की शामिल है। इसके अलावा दो बच्चे पश्चिम बंगाल से, दो उत्तर प्रदेश से और एक-एक राजस्थान तथा कर्नाटक से हैं।

दुकान मालिकों पर कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने बताया कि बाल मजदूरी कराने वाले दुकानदारों के खिलाफ आरएमसी यार्ड पुलिस स्टेशन में चार मामले दर्ज किए गए हैं। ये मामले 'बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम' और 'किशोर न्याय अधिनियम' की धाराओं के तहत दर्ज हुए हैं। इसके अतिरिक्त, 'बाल और किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986' के तहत भी पांच अलग मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

इसी अभियान के दौरान सड़क किनारे काम करते पाए गए 10 अन्य बच्चों को भी बचाया गया और उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए बेंगलुरु की बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, इस अभियान का उद्देश्य बच्चों को श्रम से मुक्त कराना और उनका पुनर्वास सुनिश्चित करना है।

इनपुट: IANS

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News4Social समाज डेस्क

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