शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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उत्तराखंड में खड़गे की सभा के बाद 'शुद्धिकरण' का मामला, झारखंड कांग्रेस ने दर्ज कराई FIR की अर्जी

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक जनसभा के बाद उत्तराखंड में हुए कथित 'शुद्धिकरण' मामले की गूंज अब झारखंड तक पहुंच गई है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग ने इस घटना को…

उत्तराखंड में खड़गे की सभा के बाद 'शुद्धिकरण' का मामला, झारखंड कांग्रेस ने दर्ज कराई FIR की अर्जी
(फोटो: IANS)

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक जनसभा के बाद उत्तराखंड में हुए कथित 'शुद्धिकरण' मामले की गूंज अब झारखंड तक पहुंच गई है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग ने इस घटना को लेकर रांची के कोतवाली थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शिकायत में इस कृत्य को अनुसूचित जाति समाज का अपमान बताते हुए प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

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यह पूरा मामला 8 अगस्त को उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में हुई मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा से जुड़ा है। आरोप है कि सभा समाप्त होने के बाद, उसी स्थान पर कुछ लोगों ने 'शुद्धिकरण यज्ञ' और हवन का आयोजन किया और गंगाजल का छिड़काव भी किया।

जातिगत भेदभाव का गंभीर आरोप

झारखंड कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रशांत किशोर ने अपनी शिकायत में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचारों और वीडियो का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन कथित तौर पर श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े लोगों ने किया था। प्रशांत किशोर ने कहा, "यदि किसी व्यक्ति की जातिगत पहचान के कारण उसके कार्यक्रम के बाद किसी सार्वजनिक स्थान को ‘शुद्ध’ करने की जरूरत बताई जाती है तो यह केवल उस व्यक्ति के अपमान का मामला नहीं है, बल्कि अनुसूचित जाति समाज के सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से भी जुड़ा गंभीर विषय है।"

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खड़गे न केवल कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, बल्कि अनुसूचित जाति समाज के एक प्रमुख प्रतिनिधि भी हैं। ऐसे में उनके कार्यक्रम के बाद स्थल का शुद्धिकरण किया जाना पूरे समाज के लिए "अपमानजनक और पीड़ादायक" है।

संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन

कांग्रेस नेता ने कहा कि इस घटना को लेकर झारखंड में भी समाज के लोगों में गहरी नाराजगी है। उन्होंने पुलिस से मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। अपनी शिकायत में प्रशांत किशोर ने कहा, "संविधान जाति के आधार पर भेदभाव और अस्पृश्यता को समाप्त करता है। ऐसे में किसी व्यक्ति की जाति या सामाजिक पहचान के आधार पर उसके स्पर्श अथवा उपस्थिति को अपवित्र मानने वाली सोच स्वीकार नहीं की जा सकती।" उन्होंने कहा कि अगर जांच में यह साबित होता है कि यह कृत्य जातिगत भेदभाव के उद्देश्य से किया गया था, तो यह गंभीर कानूनी कार्रवाई का आधार बनेगा।

इनपुट: IANS

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News4Social समाज डेस्क

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