शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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महिला आयोग की सिफारिश: निजी क्षेत्र में भी मिले चाइल्ड केयर लीव, पुरुषों को भी मिले बराबर हक

कामकाजी माता-पिता की सहूलियत और बच्चों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने केंद्र सरकार को 37 महत्वपूर्ण सिफारिशें भेजी हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन…

महिला आयोग की सिफारिश: निजी क्षेत्र में भी मिले चाइल्ड केयर लीव, पुरुषों को भी मिले बराबर हक
(फोटो: IANS)

कामकाजी माता-पिता की सहूलियत और बच्चों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने केंद्र सरकार को 37 महत्वपूर्ण सिफारिशें भेजी हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन सिफारिशों का मुख्य जोर निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को भी चाइल्ड केयर लीव (CCL) के दायरे में लाना और इसे लैंगिक रूप से तटस्थ बनाना है, ताकि पुरुष भी इसका लाभ उठा सकें।

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ये प्रस्ताव कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को सौंपे गए हैं। इनका लक्ष्य बच्चों की परवरिश में माता-पिता की साझा जिम्मेदारी को बढ़ावा देना, सभी महिलाओं को मातृत्व सुरक्षा देना और दफ्तरों को परिवार के अनुकूल बनाना है।

प्रमुख सिफारिशें और बदलाव के प्रस्ताव

आयोग की 'मातृत्व एवं बाल देखभाल से संबंधित कानूनों' पर आधारित यह रिपोर्ट 5 मई 2026 को नई दिल्ली में हुए एक राष्ट्रीय परामर्श के बाद तैयार की गई है। इसमें मातृत्व लाभ, पितृत्व अवकाश और चाइल्ड केयर इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे नौ प्रमुख क्षेत्रों में सुधार के सुझाव दिए गए हैं।

सिफारिशों के कुछ मुख्य बिंदु:

  • चाइल्ड केयर लीव: मौजूदा 730 दिनों की CCL को माता-पिता के बीच 365-365 दिनों में बराबर बांटने का प्रस्ताव है।
  • गोद लेने वाली मांएं: गोद लेने वाली और सरोगेसी के जरिए मां बनने वाली महिलाओं के लिए छुट्टी 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते करने की सिफारिश की गई है।
  • स्तनपान सुविधा: कामकाजी माताओं के लिए स्तनपान ब्रेक को 15 मिनट से बढ़ाकर 30 मिनट करने और दफ्तरों में अलग कक्ष बनाने का सुझाव है।

असंगठित और निजी क्षेत्र पर विशेष ध्यान

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि 90 प्रतिशत से ज्यादा महिला कामगार अभी मातृत्व लाभ के प्रभावी दायरे से बाहर हैं। इसे देखते हुए आयोग ने असंगठित क्षेत्र के साथ-साथ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी ये लाभ देने की सिफारिश की है। इसके लिए सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत एक अलग 'मैटरनिटी एंड चाइल्डकेयर फंड' बनाने का प्रस्ताव है, जिसमें सरकार और नियोक्ता दोनों योगदान देंगे।

निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए भी चरणबद्ध तरीके से चाइल्ड केयर लीव लागू करने का सुझाव दिया गया है। इसकी शुरुआत बड़े उद्योगों से हो सकती है और बाद में इसे छोटे उद्यमों तक बढ़ाया जा सकता है।

पितृत्व अवकाश और क्रेच की सुविधा

राष्ट्रीय महिला आयोग ने बच्चों की देखभाल में पिता की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते हुए निजी और असंगठित क्षेत्र में भी अनिवार्य सवैतनिक पितृत्व अवकाश (Paid Paternity Leave) लागू करने की सिफारिश की है। आयोग का मानना है कि इसे एक जरूरी अधिकार के तौर पर मान्यता मिलनी चाहिए।

इसके अलावा, क्रेच सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया है। आयोग ने केंद्र और राज्यों के सहयोग से 'राष्ट्रीय बाल देखभाल बुनियादी ढांचा मिशन' शुरू करने का सुझाव दिया है, जिसका लक्ष्य 2030 तक पांच लाख क्रेच सीटें तैयार करना है।

इनपुट: IANS

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News4Social समाज डेस्क

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