छत्तीसगढ़: पुल अधूरा, जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे बच्चे, NHRC ने सरकार से मांगा जवाब
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्कूली बच्चों की जान हर दिन दांव पर लग रही है। उन्हें स्कूल पहुँचने के लिए पैरी नदी पर बने एक अधूरे पुल से जुड़ी फिसलन भरी लोहे की सीढ़ी का सहारा लेना पड़ रहा है। इस…
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्कूली बच्चों की जान हर दिन दांव पर लग रही है। उन्हें स्कूल पहुँचने के लिए पैरी नदी पर बने एक अधूरे पुल से जुड़ी फिसलन भरी लोहे की सीढ़ी का सहारा लेना पड़ रहा है। इस गंभीर स्थिति पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, NHRC ने इस मामले को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने राज्य सरकार से दो हफ़्तों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
छह साल से अधूरा पुल
यह मामला गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक का है, जहाँ देहारगुडा और खंभाथा के बीच करीब 300 मीटर लंबे पुल का निर्माण पिछले छह साल से चल रहा है। खंभाथा और आसपास की बस्तियों के दर्जनों बच्चे इसी रास्ते से स्कूल जाते हैं। 3 सितंबर को सामने आई मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि मानसून के दौरान उफान पर आई पैरी नदी को पार करना और भी खतरनाक हो जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब एक साल पहले अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि पुल का काम छह महीने में पूरा हो जाएगा। लेकिन, यह निर्माण कार्य आज भी अधूरा है, जिसके चलते न केवल बच्चे बल्कि स्थानीय निवासी भी खतरनाक तरीके से नदी पार करने को मजबूर हैं।
क्या है NHRC?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत स्थापित एक स्वायत्त संस्था है। इसका मुख्य कार्य देश में जीवन, स्वतंत्रता, समानता और सम्मान जैसे मानवाधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देना है। आयोग के पास यह अधिकार है कि वह मीडिया रिपोर्टों के आधार पर भी मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों पर स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सकता है।
इनपुट: IANS



