मेकेदातु बांध पर कर्नाटक का रुख बदला, तमिलनाडु में चिंता बढ़ी, PMK ने दी चेतावनी
कर्नाटक के मेकेदातु में कावेरी नदी पर प्रस्तावित बांध को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। पट्टाली मक्कल काची (PMK) के नेता डॉ. अंबुमणि रामदास ने कर्नाटक सरकार पर परियोजना में जल्दबाज़ी करने और अपने…
कर्नाटक के मेकेदातु में कावेरी नदी पर प्रस्तावित बांध को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। पट्टाली मक्कल काची (PMK) के नेता डॉ. अंबुमणि रामदास ने कर्नाटक सरकार पर परियोजना में जल्दबाज़ी करने और अपने वादे से मुकरने का आरोप लगाते हुए तमिलनाडु सरकार को आगाह किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, रामदास ने कहा है कि अगर यह बांध बन गया तो तमिलनाडु कावेरी नदी पर अपने अधिकार खो सकता है।
यह पूरा मामला कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के उस हालिया बयान के बाद गरमाया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार बांध निर्माण के प्रयासों में तेज़ी लाएगी और जल्द ही केंद्र से इसकी मंज़ूरी लेगी। शिवकुमार ने यह भी कहा कि मेकेदातु बांध से कर्नाटक के किसानों को उसी तरह फ़ायदा होगा, जैसे कृष्णराज सागर बांध से हुआ था।
सिंचाई के लिए पानी के इस्तेमाल की आशंका
डॉ. रामदास ने शिवकुमार के बयान को निंदनीय बताते हुए कहा कि इससे कर्नाटक के रुख में एक बड़ा बदलाव दिखता है। उन्होंने तर्क दिया कि किसानों को फ़ायदा पहुँचाने की बात यह संकेत देती है कि जलाशय के पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए किया जाएगा। यह कर्नाटक के पहले के उस आश्वासन के बिल्कुल विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि परियोजना का उद्देश्य सिर्फ़ पीने के पानी की आपूर्ति करना है और खेती के लिए पानी का इस्तेमाल नहीं होगा।
PMK नेता के मुताबिक, इन नए बयानों से उनकी पार्टी की पुरानी चिंता सही साबित हुई है कि कर्नाटक जमा किए गए पानी का इस्तेमाल करेगा, जिससे तमिलनाडु के लिए कावेरी का प्रवाह घट जाएगा। उन्होंने कहा कि सिंचाई के लिए पानी का इस्तेमाल विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) में बताए गए उद्देश्यों से अलग है और सिर्फ़ यही आधार परियोजना को रद्द करने के लिए काफ़ी है।
तमिलनाडु सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपील
डॉ. रामदास ने तमिलनाडु सरकार से आग्रह किया है कि वह कर्नाटक के इस बदले हुए रुख को बिना देर किए केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाए। उन्होंने प्रस्तावित जलाशय के आकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि जहाँ DPR में डूब क्षेत्र का अनुमान 5,000 हेक्टेयर (लगभग 12,500 एकड़) था, वहीं मुख्यमंत्री शिवकुमार ने इसे 5,400 हेक्टेयर (लगभग 13,500 एकड़) बताया।
रामदास ने चेतावनी दी कि बड़े जलाशय से जंगलों, वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्र को ज़्यादा नुकसान हो सकता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि तमिलनाडु को हर उपलब्ध कानूनी और संवैधानिक रास्ते का इस्तेमाल कर इस परियोजना को आगे बढ़ने से रोकना चाहिए।
इनपुट: IANS



