गुरूवार, 23 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
अपराध

कोलकाता एयरपोर्ट: एक यात्री के बैग से 700 से ज़्यादा दुर्लभ कछुए मिले, भारत के पर्यावरण के लिए बड़ा ख़तरा

भारत में पालतू जानवरों के बढ़ते अवैध बाज़ार और उससे जुड़े खतरों का एक बड़ा मामला कोलकाता में सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, बुधवार रात नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर…

कोलकाता एयरपोर्ट: एक यात्री के बैग से 700 से ज़्यादा दुर्लभ कछुए मिले, भारत के पर्यावरण के लिए बड़ा ख़तरा
(फोटो: IANS)

भारत में पालतू जानवरों के बढ़ते अवैध बाज़ार और उससे जुड़े खतरों का एक बड़ा मामला कोलकाता में सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, बुधवार रात नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम विभाग के अधिकारियों ने एक यात्री के सामान से 707 ज़िंदा कछुए बरामद किए। बैंकॉक से लौटे इस यात्री को वन्यजीव तस्करी के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया है।

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यह घटना उस वक्त सामने आई जब यात्री ग्रीन चैनल से गुज़र रहा था और एयर इंटेलिजेंस यूनिट (एआईयू) के अधिकारियों को उसके बैग के अंदर कुछ संदिग्ध हलचल महसूस हुई। तलाशी लेने पर बैग के अंदर से बड़ी संख्या में कछुए मिले। बाद में इनकी पहचान 'रेड-ईयर्ड स्लाइडर' प्रजाति के रूप में हुई, जिसे दुनिया की 100 सबसे आक्रामक प्रजातियों में से एक माना जाता है।

क्यों खतरनाक है इन कछुओं की तस्करी?

वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, ये कछुए भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। जब लोग इन्हें पालतू जानवर के तौर पर रखने के बाद पाल नहीं पाते और नदियों या तालाबों जैसे जल स्रोतों में छोड़ देते हैं, तो ये भारत की मीठे पानी में पाई जाने वाली 29 देशी कछुआ प्रजातियों के लिए संकट बन जाते हैं। ये आक्रामक प्रजाति भोजन, धूप सेंकने की जगह और अंडे देने के स्थान के लिए स्थानीय प्रजातियों से मुकाबला करती है, जिससे उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाता है।

पालतू बाज़ार की मांग और स्वास्थ्य का जोखिम

भारत में रेड-ईयर्ड स्लाइडर कछुओं की तस्करी के पीछे पालतू बाज़ार में इनकी भारी मांग एक मुख्य कारण है। इनके शरीर पर आकर्षक लाल निशान होते हैं और इन्हें पालना आसान माना जाता है। चूँकि भारत में पाए जाने वाले स्थानीय कछुए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत पूरी तरह संरक्षित हैं, इसलिए कुछ लोग अवैध तरीकों से इस विदेशी प्रजाति को मंगाते हैं।

इन कछुओं से इंसानों के स्वास्थ्य को भी सीधा खतरा है। यह प्रजाति 'साल्मोनेला बैक्टीरिया' की वाहक हो सकती है, जो खासकर बच्चों के लिए हानिकारक है। फिलहाल, एआईयू अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि इन कछुओं को कहाँ से लाया गया था और इन्हें कहाँ पहुँचाया जाना था। बरामद की गई जीवित प्रजातियों को उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया अपनाई जाती है ताकि वे भारतीय पर्यावरण में न फैल सकें।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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