मंगलवार, 21 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
अपराध

हिमाचल: सरकारी अनुदान में हेरफेर का आरोप, पूर्व विधायक होशियार सिंह के खिलाफ FIR

हिमाचल प्रदेश के देहरा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक होशियार सिंह चंब्याल के खिलाफ सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह…

हिमाचल: सरकारी अनुदान में हेरफेर का आरोप, पूर्व विधायक होशियार सिंह के खिलाफ FIR
(फोटो: IANS)

हिमाचल प्रदेश के देहरा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक होशियार सिंह चंब्याल के खिलाफ सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (State Vigilance and Anti-Corruption Bureau) ने की है, जिससे चंब्याल की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

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यह पूरा मामला अनुदान योजना के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है। आरोप है कि सहायता राशि लाभार्थियों तक पहुंचने के बजाय पूर्व विधायक को वापस सौंप दी गई। शिकायत खुद होशियार सिंह की एक कंपनी के कर्मचारियों ने की थी, जिसके बाद सतर्कता विभाग ने जांच शुरू की।

जांच में क्या सामने आया?

अधिकारियों के मुताबिक, जांच में पाया गया कि साल 2023 और 2024 के दौरान कुछ लोगों के नाम पर वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई थी। हालांकि, जब इन लोगों से संपर्क किया गया, तो शिकायतकर्ता समेत कई ने बताया कि उन्होंने ऐसी किसी भी सहायता के लिए कभी आवेदन ही नहीं किया था।

जांच के दौरान इन लाभार्थियों ने कथित तौर पर यह भी बताया कि जैसे ही सरकारी सहायता उनके बैंक खातों में आई, उन्होंने उसे नकद निकालकर पूर्व विधायक के निर्देश पर उन्हें सौंप दिया। अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच में जुटाए गए दस्तावेजी सबूतों और बैंक रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह साबित होता है कि सरकारी पैसे का इस्तेमाल उसके निर्धारित उद्देश्य के लिए नहीं किया गया।

कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच

मामले में आपराधिक न्यासभंग (criminal breach of trust) और धोखाधड़ी (cheating) के तत्व पाए जाने पर धर्मशाला में एफआईआर दर्ज कर कानूनी जांच शुरू कर दी गई है। सतर्कता ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और सबूतों पर आधारित होगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर मामले में अन्य लोगों की भूमिका और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अतिरिक्त अपराधों की संभावना का भी पता लगाया जाएगा।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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