सारनाथ अब यूनेस्को विश्व धरोहर: प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति ने बताया 'हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण'
भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है, जो भारत के लिए एक बड़ी सांस्कृतिक उपलब्धि है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस घोषणा के बाद…
भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है, जो भारत के लिए एक बड़ी सांस्कृतिक उपलब्धि है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन समेत चीन में भारतीय दूतावास ने इसे देश के लिए गौरव का क्षण बताया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सम्मान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश स्थित सारनाथ का भगवान बुद्ध से गहरा नाता है और उनका ज्ञान, करुणा व सद्भाव का संदेश आज भी दुनिया को प्रेरित करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस वैश्विक मान्यता से और अधिक लोग सारनाथ आकर भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे।
शीर्ष नेतृत्व ने दी बधाई
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी इस उपलब्धि को हर भारतीय के लिए गर्व का पल बताया। उन्होंने कहा कि सारनाथ शांति, ज्ञान और करुणा का स्थायी प्रतीक है और यह सम्मान भारत की प्राचीन सभ्यता व आध्यात्मिक विचारों की वैश्विक प्रासंगिकता को प्रमाणित करता है। वहीं, चीन में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "यह भारत की गहरी सभ्यता और आध्यात्मिक विरासत, और सारनाथ के ज्ञान, करुणा और सद्भाव के हमेशा रहने वाले संदेश की एक बड़ी पहचान है।"
सारनाथ का ऐतिहासिक महत्व
सारनाथ बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश यहीं दिया था, जिसे 'धर्मचक्र प्रवर्तन' कहा जाता है। इसी ऐतिहासिक महत्व के कारण यह स्थल दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों और पर्यटकों के लिए आस्था का केंद्र रहा है।
यूनेस्को की इस घोषणा के बाद सारनाथ की वैश्विक पहचान और मज़बूत होने की उम्मीद है। इससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को गति मिलने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होने की भी संभावना है।
इनपुट: IANS



