गुजरात में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बना
गुजरात अब उत्तराखंड के बाद देश का दूसरा राज्य बन गया है जहाँ समान नागरिक संहिता (UCC) कानून लागू हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 'गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026' विधेयक को अपनी स्वीकृति दे…
गुजरात अब उत्तराखंड के बाद देश का दूसरा राज्य बन गया है जहाँ समान नागरिक संहिता (UCC) कानून लागू हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 'गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026' विधेयक को अपनी स्वीकृति दे दी है, जिसके बाद राज्य सरकार ने राजपत्र (गजट) अधिसूचना भी जारी कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस मंजूरी के साथ ही राज्य में कानून को अमल में लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
यह कानून राज्य के सभी नागरिकों पर उनके धर्म से परे, विवाह, तलाक, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान नियम लागू करेगा। गुजरात विधानसभा ने इसी साल मार्च 2026 में यह विधेयक पारित किया था। अब राज्य सरकार एक अलग अधिसूचना के जरिए यह तय करेगी कि कानून किस तारीख से पूरी तरह प्रभावी होगा।
विवाह और संबंधों पर नए नियम
इस कानून के तहत विवाह का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरा विवाह करने पर पूरी तरह से रोक होगी, क्योंकि कानून में एकविवाह को मान्यता दी गई है। इसके अलावा, लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को भी एक निर्धारित प्रक्रिया और समय-सीमा के भीतर अपने संबंध को पंजीकृत कराना होगा।
विरासत और संपत्ति में बराबरी का हक़
नए UCC कानून का एक महत्वपूर्ण पहलू संपत्ति के अधिकारों में समानता लाना है। अब पैतृक संपत्ति और अन्य विरासत के मामलों में बेटियों को भी बेटों के बराबर अधिकार मिलेगा। कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर किसी व्यक्ति की बिना वसीयत बनाए मृत्यु हो जाती है, तो उसकी संपत्ति पर उसके जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता का क्या अधिकार होगा।
बच्चों के अधिकारों का संरक्षण
यह कानून सरोगेसी और गोद लिए गए बच्चों को भी जैविक बच्चों के समान कानूनी अधिकार और सुरक्षा प्रदान करता है। इसके साथ ही, लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चों के अधिकारों को भी कानूनी संरक्षण दिया गया है, ताकि उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
किसे मिली है छूट?
गुजरात UCC के प्रावधानों से अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को बाहर रखा गया है। यह छूट आदिवासी समुदायों की पारंपरिक सामाजिक और वैवाहिक व्यवस्थाओं को संरक्षित रखने के उद्देश्य से दी गई है।
कानून बनने की प्रक्रिया
गुजरात में UCC की पहल 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले शुरू हुई थी, जब राज्य सरकार ने इसकी संभावनाओं पर विचार के लिए एक समिति बनाने की घोषणा की। इसके बाद, फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया। समिति की रिपोर्ट के आधार पर मार्च 2026 में विधानसभा में विधेयक पेश किया गया और 24 मार्च 2026 को इसे पारित कर दिया गया।
इनपुट: IANS



