मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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कोलकाता पंडाल हादसा: CCTV फुटेज से खुलासा, पुलिस की अपील के बावजूद नहीं हटी थी भीड़

उत्तरी कोलकाता के चोरबागन दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर को हुई भगदड़ की जांच में एक महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। इस 15 मिनट के वीडियो से पता चलता है कि हादसे से ठीक पहले पंडाल के अंदर…

कोलकाता पंडाल हादसा: CCTV फुटेज से खुलासा, पुलिस की अपील के बावजूद नहीं हटी थी भीड़
(फोटो: IANS)

उत्तरी कोलकाता के चोरबागन दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर को हुई भगदड़ की जांच में एक महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। इस 15 मिनट के वीडियो से पता चलता है कि हादसे से ठीक पहले पंडाल के अंदर और बाहर मौजूद श्रद्धालु पुलिस की चेतावनियों को लगातार नज़रअंदाज़ कर रहे थे। इस दुखद घटना में 19 लोगों की जान चली गई थी।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) को यह फुटेज मिला है, जो 17 अक्टूबर की शाम 7:15 बजे से 7:30 बजे के बीच का है। फुटेज में साफ दिख रहा है कि पुलिसकर्मी पंडाल के अंदर मौजूद लोगों से बाहर निकलने और बाहर इंतजार कर रहे लोगों से अंदर न जाने का अनुरोध कर रहे थे, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

जांच में सामने आईं अहम बातें

पुलिस सूत्रों ने बताया कि बारिश के कारण स्थिति और बिगड़ गई। पंडाल के अंदर मौजूद लोग बाहर नहीं निकलना चाहते थे, जबकि बाहर खड़े लोग भीगने से बचने के लिए अंदर जाने की कोशिश करते रहे। इसके चलते भगदड़ से ठीक पहले पंडाल के भीतर दम घुटने जैसे हालात बन गए थे। कई चश्मदीदों ने भी पूछताछ में पुलिस द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिशों की पुष्टि की है।

जांच में यह भी सामने आया है कि पूजा समिति द्वारा तैनात किए गए निजी सुरक्षा गार्ड पेशेवर नहीं थे। आयोजकों ने कुछ स्थानीय बेरोज़गार युवाओं को इस काम पर रखा था, जिन्हें भीड़ प्रबंधन का कोई प्रशिक्षण या अनुभव नहीं था। SIT अब पूजा समिति के आयोजकों से इस मामले में विस्तृत पूछताछ कर रही है।

दोहरी जांच प्रक्रिया जारी

इस हादसे की जांच के लिए SIT के अलावा राज्य सरकार ने छह सदस्यों वाला एक न्यायिक जांच पैनल भी गठित किया है। इस पैनल की अध्यक्षता सेवानिवृत्त जस्टिस अनिंदिता रॉय सरस्वती कर रही हैं। उन्होंने सोमवार को जानकारी दी कि पैनल 31 अक्टूबर से सबूत जुटाने का काम शुरू करेगा। इस न्यायिक जांच पैनल को अपनी रिपोर्ट छह महीने के भीतर राज्य सरकार को सौंपनी है।

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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