नवरात्रि मां दुर्गा की व्रत कथा 2021
नवरात्रि में मां दुर्गा का व्रत करना तथा कथा सुनना विशेष फलदायी है. ऐसा माना जाता है कि भगवान राम ने भी रावण पर आक्रमण करने से पहले मां शक्ति की पूजा की थी.
नवरात्रि में मां दुर्गा का व्रत करना तथा कथा सुनना विशेष फलदायी है. ऐसा माना जाता है कि भगवान राम ने भी रावण पर आक्रमण करने से पहले मां शक्ति की पूजा की थी. इसके अलावा महिषासुर नामक राक्षस का वध करने के लिए दुर्गा मां की अराधना की गई थी. दुर्गा माता के लिए अनेंक कथाएं प्रचलित हैं. आईए दुर्गा माता की नवरात्रि व्रत कथा को पढ़ें-

एक नगर में एक ब्राह्मण रहता था. वह मां शक्ति का परम भक्त था. वह अपनी पुत्री के साथ नियमित रूप से मां शक्ति की पूजा तथा यज्ञ किया करता था. एक दिन उस ब्राह्मण की पुत्री जिसका नाम सुमति था. वो बाहर खेलने चली जाती है. जिससे वह अपने पिता के साथ मां शक्ति की पूजा में शामिल नहीं हो पाती है. इस कारण ब्राह्मण को बहुत क्रोध आ जाता है तथा वह फैसला करता है कि वह अपनी पुत्री का विवाह किसी दरिद्र तथा कोढ़ी पुरूष से करेगा. ब्रह्मण की पुत्री को अपनी गलती का अहसास हुआ तथा वह बहुत दुखी हुई. लेकिन उसने अपने पिता द्वारा क्रोध में कही गई बात को स्वीकार कर लिया. उसकी शादी दरिद्र से कर दी जाती है. उसका पति इतना गरीब था कि उसके पास घर भी नहीं था. जिसके कारण उसे जंगल में घास के आसन पर रात बितानी पडती है.

गरीब कन्या की यह दशा देखकर माता भगवती उसके द्वारा पिछले जन्म में किए गए उसके पुण्य प्रभाव से प्रकट हुईं और सुमति से बोलीं 'हे कन्या मैं तुमपर प्रसन्न हूं' मैं तुम्हें कुछ देना चाहती हूं, मांगों क्या मांगती हों. सुमति माता से पूछती है कि माता आप मेरे किस पुण्य से प्रसन्न हैं. तब माता सुमति को बताती हैं कि तुम पूर्व जन्म में भील की पतिव्रता स्त्री थी. एक दिन तुम्हारे पति भील द्वारा चोरी करने के कारण तुम दोनों को सिपाहियों ने पकड़ कर जेलखाने में कैद कर दिया था. उन लोगों ने तुम्हें और तुम्हारे पति को भोजन भी नहीं दिया था. इस प्रकार नवरात्र के दिनों में तुम दोनों को भूखा रहना पड़ा. इन नौ दिन में तुम्हारा नवरात्र व्रत पूरा हो गया.
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इसके बाद माता बताती हैं कि उन दिनों अनजाने में जो व्रत हुआ, उस व्रत के प्रभाव से प्रसन्न हूँ. इसके बाद सुमति कहती हैं कि माता अगर आप मुझसे प्रसन्न हैं तो मेरे पति को ठीक कर दिजिए. माता की दया से उसके पति ठीक हो जाते हैं तथा उनके जीवन में खुशियां लौट आती हैं.



