एवरेस्ट और बांधानी हींग की बिक्री पर FSSAI ने क्यों लगाई रोक? जानिए पूरी वजह
अगर आप खाने में एवरेस्ट या बांधानी ब्रांड की हींग (Asafoetida) का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए ज़रूरी है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने गुणवत्ता मानकों पर खरा न उतरने के…
अगर आप खाने में एवरेस्ट या बांधानी ब्रांड की हींग (Asafoetida) का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए ज़रूरी है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने गुणवत्ता मानकों पर खरा न उतरने के कारण इन दोनों ब्रांडों की हींग की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत की गई है।
FSSAI ने एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के सभी तरह के कंपाउंडेड हींग और मेसर्स लालजी गोधू एंड कंपनी (जो बांधानी ब्रांड नाम से उत्पाद बेचती है) के हींग के निर्माण और बिक्री पर अगले आदेश तक प्रतिबंध लगाया है।
जांच में क्या मिला?
FSSAI की जांच में सामने आया कि एवरेस्ट की हींग 'सब-स्टैंडर्ड' (घटिया) और 'मिसब्रांडेड' थी। सबसे बड़ी कमी हींग में 'अल्कोहल में घुलनशील अर्क' की मात्रा में पाई गई। नियमों के अनुसार यह मात्रा कम से कम 5% होनी चाहिए, लेकिन जांचे गए नमूनों में यह बहुत कम मिली:
- एक सैंपल में यह मात्रा शून्य (0.00%) थी।
- पीले हींग पाउडर में यह 3.29% पाई गई।
- काले हींग पाउडर में यह 4.40% मिली।
इसी तरह, लालजी गोधू एंड कंपनी की हींग भी घटिया और मिलावटी पाई गई। जांच में पता चला कि इसे बनाने में इस्तेमाल हुई कच्ची हींग में तय सीमा (1%) से ज़्यादा स्टार्च मिलाया गया था।
एवरेस्ट के दूसरे मसालों में भी मिली खामियां
प्राधिकरण ने बताया कि हींग पर प्रतिबंध लगाने के अलावा, एवरेस्ट के कुछ अन्य मसाला उत्पादों में भी लेबलिंग से जुड़ी गड़बड़ियां मिली हैं। इनमें चिकन मसाला, गरम मसाला और एग करी पाउडर शामिल हैं। इन उत्पादों के लेबल पर 5% से ज़्यादा नमक होने की जानकारी नहीं दी गई थी और मसालों की मात्रा का भी सही उल्लेख नहीं था, जो नियमों का उल्लंघन है। हालांकि, FSSAI का मौजूदा प्रतिबंध केवल कंपाउंडेड हींग की बिक्री पर है।
आगे क्या होगा?
FSSAI ने दोनों कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने उत्पादों को मानकों के अनुरूप बनाने के लिए एक सुधारात्मक कार्ययोजना पेश करें। अगर कंपनियां संतोषजनक जवाब नहीं देती हैं या नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उन पर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इनपुट: IANS



