सुभाष चंद्रा के दिवालियापन मामले में NCLT के फैसले से यूनियन बैंक नाराज़, NCLAT में देगा चुनौती
एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा से जुड़े व्यक्तिगत दिवालियापन मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा स्वीकृत समाधान…
एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा से जुड़े व्यक्तिगत दिवालियापन मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा स्वीकृत समाधान योजना को ऊपरी अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, बैंक इस आदेश के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में अपील करेगा।
यह मामला इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की एक याचिका पर शुरू हुआ था। इसमें यूनियन बैंक समेत कई सरकारी ऋणदाताओं ने प्रस्तावित समाधान योजना का पुरजोर विरोध किया था। उनका तर्क था कि इस योजना से कर्ज देने वालों के हितों की पूरी तरह अनदेखी हो रही है।
क्यों हुआ विवाद और अब क्या?
यूनियन बैंक ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उसकी यूके स्थित इकाई, केनरा बैंक और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस जैसे सार्वजनिक संस्थानों ने समाधान योजना के खिलाफ मतदान किया था। इसके बावजूद, कुछ निजी क्षेत्र के ऋणदाताओं के बहुमत समर्थन के कारण योजना को मंजूरी के लिए जरूरी वोट मिल गए, जिसके बाद NCLT ने इसे अपनी स्वीकृति दे दी। इसी फैसले के खिलाफ अब बैंक ने कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने का मन बनाया है।
यूनियन बैंक अकेला नहीं है। HDFC बैंक भी इस आदेश के खिलाफ अपील करने की संभावनाएं तलाश रहा है। HDFC बैंक का कहना है कि उसके लगभग 680 करोड़ रुपए के दावे में से सिर्फ 3.2 प्रतिशत राशि ही स्वीकार की गई है, जिसके चलते वह भी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है। इस फैसले ने वित्तीय जगत में हलचल मचा दी है क्योंकि इसमें ऋणदाताओं को उनके दावों का बेहद मामूली हिस्सा ही मिलने की संभावना है।
सुभाष चंद्रा का पक्ष
इस पूरे प्रकरण पर सुभाष चंद्रा ने भी अपनी स्थिति साफ की है। उनका कहना है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कोई कर्ज नहीं लिया था, बल्कि एस्सेल समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए केवल एक व्यक्तिगत गारंटर की भूमिका निभाई थी। चंद्रा ने यह भी कहा कि मीडिया में जो 22,006 करोड़ रुपए का आंकड़ा बताया जा रहा है, वह दिवालियापन प्रक्रिया में दाखिल कुल दावों की रकम है, न कि अंतिम वित्तीय देनदारी।
इनपुट: IANS



