नमो भारत कॉरिडोर का बड़ा कदम: अब 60% बिजली सौर ऊर्जा से मिलेगी, सालाना 1.77 लाख टन कार्बन उत्सर्जन घटेगा
दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। कॉरिडोर की बिजली की कुल जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा अब सौर ऊर्जा से पूरा किया जाएगा…
दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। कॉरिडोर की बिजली की कुल जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा अब सौर ऊर्जा से पूरा किया जाएगा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) ने 110 मेगावॉट के एक कैप्टिव सोलर पावर प्लांट के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह समझौता एनसीआरटीसी ने एनआईआरएल की सहायक कंपनी एनएनआरएल (एनआईआरएल एनसीआरटीसी रिन्यूएबल्स लिमिटेड) के साथ किया है। यह परियोजना न सिर्फ कॉरिडोर को स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करेगी, बल्कि लंबे समय में बिजली की लागत को भी नियंत्रित करने में मदद करेगी।
परियोजना की लागत और स्थान
उत्तर प्रदेश के जालौन शहर में विकसित होने वाले इस सोलर पावर प्लांट की अनुमानित लागत करीब 450 करोड़ रुपये है। इसे 80:20 के डेट-इक्विटी फंडिंग मॉडल के तहत तैयार किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह देश की किसी भी आरआरटीएस या मेट्रो परिवहन प्रणाली के लिए अपनी तरह की पहली कैप्टिव सौर ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है। प्लांट से उत्पन्न बिजली को उत्तर प्रदेश स्टेट ग्रिड के माध्यम से दिल्ली और उत्तर प्रदेश में स्थित एनसीआरटीसी के रिसीविंग सबस्टेशनों तक पहुंचाया जाएगा, जहाँ से यह कॉरिडोर के संचालन में इस्तेमाल होगी।
आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ
दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के कुल परिचालन खर्च में बिजली की हिस्सेदारी लगभग 30 से 35 प्रतिशत है। इस सोलर प्लांट के चालू होने के बाद बिजली खर्च में करीब 25 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है, जो इसे आर्थिक रूप से भी बेहद अहम बनाता है। समझौते के तहत, एनसीआरटीसी 25 वर्षों तक एक निश्चित टैरिफ पर बिजली खरीदेगा, जिससे बाजार में बिजली की कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर कॉरिडोर के संचालन पर नहीं पड़ेगा।
पर्यावरण की दृष्टि से भी यह एक बड़ी पहल है। अनुमान है कि पारंपरिक ऊर्जा की जगह सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से हर साल लगभग 1.77 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा। साथ ही नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे अन्य प्रदूषकों में भी कमी आएगी। इस पूरी परियोजना को अगले 24 महीनों के भीतर चालू करने की योजना है।
बढ़ती लोकप्रियता और भविष्य की राह
फरवरी 2026 में पूरे कॉरिडोर पर परिचालन शुरू होने के बाद से नमो भारत की लोकप्रियता लगातार बढ़ी है। वर्तमान में इस पर प्रतिदिन करीब एक लाख यात्री सफर कर रहे हैं और कुल यात्राओं का आँकड़ा 4 करोड़ को पार कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस प्रणाली को सुशासन का एक अच्छा उदाहरण बताया है। यह सौर ऊर्जा परियोजना शहरी परिवहन को स्वच्छ, ऊर्जा-कुशल और टिकाऊ बनाने में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है और भविष्य के ट्रांजिट नेटवर्क के लिए एक मॉडल पेश करेगी।
इनपुट: IANS



