शनिवार, 29 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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जीएसटी का नया दौर: कारोबार में आसानी और कम विवादों के लिए इन 6 बड़े सुधारों पर टिकी हैं निगाहें

भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली, वस्तु एवं सेवा कर (GST), अपने लागू होने के लगभग एक दशक बाद अब एक नए चरण में प्रवेश करने की तैयारी में है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले दशक का लक्ष्य जहाँ देश भर में…

जीएसटी का नया दौर: कारोबार में आसानी और कम विवादों के लिए इन 6 बड़े सुधारों पर टिकी हैं निगाहें
(फोटो: IANS)

भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली, वस्तु एवं सेवा कर (GST), अपने लागू होने के लगभग एक दशक बाद अब एक नए चरण में प्रवेश करने की तैयारी में है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले दशक का लक्ष्य जहाँ देश भर में एक समान कर प्रणाली स्थापित करना था, वहीं अब दूसरे दशक का फोकस सरलीकरण, अनुपालन में आसानी और करदाताओं का विश्वास बढ़ाने पर हो सकता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, आगामी जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है, जिसमें छह प्रमुख सुधारों पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है।

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ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और कर विवाद प्रबंधन प्रमुख मनोज मिश्रा के अनुसार, जीएसटी के दूसरे दशक में प्रवेश करते समय करदाताओं के बीच विश्वास, स्पष्टता और सरलता बढ़ाना सबसे बड़ी आवश्यकता है। ये सुधार न केवल कर प्रणाली को अधिक परिपक्व बनाएंगे, बल्कि निवेश और कारोबार करने में सुगमता को भी बढ़ावा देंगे।

कानूनी विवादों में कमी लाना

जीएसटी लागू होने के बाद से ही कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कर विवाद देखने को मिले हैं। एक बड़ा उदाहरण ऑनलाइन गेमिंग उद्योग का है, जहाँ गेम्सक्राफ्ट मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये की संभावित कर मांग का मुद्दा उठा है। उद्योग का तर्क है कि वे वर्षों से प्रचलित कानूनी व्याख्या के आधार पर प्लेटफॉर्म शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी देते रहे हैं। उम्मीद है कि परिषद भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक स्पष्ट व्यवस्था लाएगी, ताकि लंबे कानूनी विवादों से बचा जा सके।

इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की व्यवस्था को सरल बनाना

मौजूदा नियमों के तहत, किसी खरीदार का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) इस बात पर निर्भर करता है कि विक्रेता ने सरकार को कर चुकाया है या नहीं। इससे कई बार ईमानदार करदाताओं को भी परेशानी होती है, क्योंकि वे अपने आपूर्तिकर्ता के कर अनुपालन को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकते। सुधारों के तहत यह अपेक्षा की जा रही है कि यदि खरीदार के पास वैध टैक्स चालान है और उसने बैंकिंग माध्यम से भुगतान किया है, तो उसे कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए। इससे विवाद कम होंगे और जीएसटी की मूल भावना मजबूत होगी।

पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना

फिलहाल पेट्रोल, डीजल, विमानन ईंधन और प्राकृतिक गैस जैसे महत्वपूर्ण उत्पाद जीएसटी से बाहर हैं। इस वजह से इन पर कई स्तरों पर कर लगता है, जिससे लागत बढ़ती है। इन उत्पादों को चरणबद्ध तरीके से जीएसटी में शामिल करने से विनिर्माण, परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों की लागत कम हो सकती है और एक एकीकृत कर व्यवस्था का लक्ष्य पूरा हो सकेगा।

अन्य महत्वपूर्ण सुधार

डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए स्पष्ट नियम: तेजी से बदल रही डिजिटल अर्थव्यवस्था में ऐप-आधारित यात्री परिवहन जैसे मॉडलों पर जीएसटी अधिनियम की धारा 9(5) को लेकर अनिश्चितता है। परिषद से उम्मीद है कि वह प्लेटफॉर्म की भूमिका और जिम्मेदारी के आधार पर एक स्पष्ट ढांचा तैयार करेगी।

पुराने क्रेडिट पर स्पष्टता: कई उद्योग अभी भी मुआवजा उपकर (कंपनसेशन सेस) से जुड़े क्रेडिट के मुद्दों पर स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं। फरवरी 2026 से कुछ वस्तुओं पर यह उपकर समाप्त करने की सिफारिश के बाद, कंपनियां अपने पुराने क्रेडिट के उपयोग को लेकर निश्चितता चाहती हैं।

तकनीक आधारित अनुपालन: जीएसटी 2.0 का सबसे अहम आधार टेक्नोलॉजी हो सकती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिसिस का उपयोग कर करदाताओं के लिए एक पारदर्शी और पूर्वानुमान-आधारित अनुपालन व्यवस्था बनाई जा सकती है, जिससे नोटिस और जांच की संख्या कम होगी।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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