मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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सेल्फी से कैंसर के इलाज का भविष्य? AI का नया मॉडल चेहरे से बताएगा मरीज़ की सेहत

कैंसर के मरीज़ों के लिए इलाज और उनके ठीक होने की संभावनाओं का आकलन करने में अब एक साधारण सी सेल्फ़ी भी मददगार हो सकती है। वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक ऐसा टूल विकसित किया…

सेल्फी से कैंसर के इलाज का भविष्य? AI का नया मॉडल चेहरे से बताएगा मरीज़ की सेहत
(फोटो: IANS)

कैंसर के मरीज़ों के लिए इलाज और उनके ठीक होने की संभावनाओं का आकलन करने में अब एक साधारण सी सेल्फ़ी भी मददगार हो सकती है। वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक ऐसा टूल विकसित किया है, जो किसी व्यक्ति के चेहरे का विश्लेषण करके उसकी जैविक उम्र (biological age) और कैंसर से जुड़े जोखिमों का अनुमान लगा सकता है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह शोध अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसने भविष्य में इलाज को और सटीक बनाने की एक नई उम्मीद जगाई है।

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अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्थित मास जनरल ब्रिघम के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इस तकनीक पर आधारित अध्ययन के निष्कर्ष 19 अक्टूबर को प्रतिष्ठित पत्रिका 'द लैंसेट डिजिटल हेल्थ' में प्रकाशित हुए हैं। इस AI मॉडल को इंसानी चेहरों की बारीकियों को समझने के लिए 4 करोड़ से अधिक तस्वीरों पर प्रशिक्षित किया गया है, ताकि यह अलग-अलग उम्र और पृष्ठभूमि के लोगों में फ़र्क कर सके।

कैसे काम करता है यह AI टूल?

इस शोध में दो खास AI टूल विकसित किए गए हैं जो एक-दूसरे के पूरक हैं। पहला, ‘एफएएचआर-फेसएज’ (FAHR-FaceAge), जो चेहरे की विशेषताओं के आधार पर व्यक्ति की जैविक उम्र का पता लगाता है। जैविक उम्र का मतलब कैलेंडर वाली उम्र से नहीं, बल्कि इस बात से है कि किसी व्यक्ति का शरीर उसकी असल उम्र के मुकाबले कितना स्वस्थ या कमज़ोर दिखता है। दूसरा टूल, ‘एफएएचआर-फेससर्वाइवल’ (FAHR-FaceSurvival), सीधे चेहरे की तस्वीर से जीवित रहने की दर से जुड़े जोखिमों का अनुमान लगाता है।

दिलचस्प बात यह है कि दोनों टूल चेहरे के अलग-अलग हिस्सों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। जैविक उम्र का अनुमान लगाने वाला मॉडल माथे, कनपटियों और नाक से मुंह तक की रेखाओं का विश्लेषण करता है, जबकि जीवित रहने की दर का आकलन करने वाला मॉडल आंखों के नीचे और नाक के ऊपरी हिस्से की विशेषताओं पर गौर करता है।

इलाज में क्यों महत्वपूर्ण है यह जानकारी?

कैंसर के इलाज में मरीज़ की उम्र के अलावा उसका समग्र स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता भी बहुत मायने रखती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि चेहरे पर दिखने वाले कुछ संकेत शरीर की सेहत के बारे में अहम जानकारी दे सकते हैं। इस AI टूल का उद्देश्य डॉक्टरों को मरीज़ की स्थिति का आकलन करने के लिए एक अतिरिक्त ज़रिया मुहैया कराना है। अगर AI किसी मरीज़ में ज़्यादा जोखिम के संकेत पाता है, तो डॉक्टर अन्य मेडिकल रिपोर्ट के साथ इस जानकारी का भी उपयोग कर उपचार के लिए ज़्यादा व्यक्तिगत दृष्टिकोण अपना सकते हैं।

चुनौतियाँ और भविष्य की राह

विशेषज्ञों ने यह साफ़ किया है कि यह तकनीक अभी किसी भी चिकित्सकीय जांच, बीमारी की अवस्था या डॉक्टरों की सलाह का विकल्प नहीं है। इसके सामने कई चुनौतियाँ भी हैं, जैसे यह सुनिश्चित करना कि यह तकनीक अलग-अलग त्वचा के रंग और विशेषताओं वाले लोगों पर समान रूप से सटीक काम करे। इसके अलावा, चेहरे की तस्वीरों से जुड़ी निजी जानकारी की सुरक्षा और मरीज़ की सहमति जैसे नैतिक सवाल भी अहम हैं। अगर भविष्य में बड़े परीक्षणों में यह तकनीक विश्वसनीय साबित होती है, तो यह कैंसर के इलाज की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है।

इनपुट: IANS

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