मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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चुनावी नियमों को लेकर मेटा फिर सवालों के घेरे में, ओवरसाइट बोर्ड ने पारदर्शिता की कमी पर जताई चिंता

फेसबुक और इंस्टाग्राम की संचालक कंपनी मेटा के स्वतंत्र ओवरसाइट बोर्ड ने चुनावी सामग्री से जुड़े नियमों को लागू करने में पारदर्शिता और एकरूपता की कमी को लेकर कंपनी की कड़ी आलोचना की है। समाचार एजेंसी…

चुनावी नियमों को लेकर मेटा फिर सवालों के घेरे में, ओवरसाइट बोर्ड ने पारदर्शिता की कमी पर जताई चिंता
(फोटो: IANS)

फेसबुक और इंस्टाग्राम की संचालक कंपनी मेटा के स्वतंत्र ओवरसाइट बोर्ड ने चुनावी सामग्री से जुड़े नियमों को लागू करने में पारदर्शिता और एकरूपता की कमी को लेकर कंपनी की कड़ी आलोचना की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड ने मंगलवार को कहा कि कंटेंट मॉडरेशन में गलतियों से न केवल जायज राजनीतिक संवाद पर असर पड़ सकता है, बल्कि चुनावी प्रक्रियाओं में जनता का भरोसा भी कम हो सकता है।

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यह आलोचना अमेरिका और ब्राजील में राजनीतिक खातों से जुड़े कंटेंट मॉडरेशन में कई गड़बड़ियों के सामने आने के बाद आई है। बोर्ड ने मेटा के चुनाव संबंधी प्रयासों में बार-बार सामने आ रही खामियों पर चिंता व्यक्त की है।

प्रमुख मामले और बोर्ड के सवाल

बोर्ड ने दो खास मामलों का उदाहरण दिया। पहला, अमेरिका में 'नो किंग्स' आंदोलन से जुड़े राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अकाउंट्स का हटाया जाना। दूसरा, ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा से जुड़े खातों पर पाबंदियां लगाना। बोर्ड के मुताबिक, इन घटनाओं ने चुनावों में दखल की आशंका को बढ़ाया है।

बोर्ड ने सवाल उठाया कि 'नो किंग्स' इंस्टाग्राम अकाउंट पर हुई गलत कार्रवाई को मेटा के अपने सुरक्षा उपायों द्वारा क्यों नहीं रोका जा सका, जिन्हें ऐसी गलतियों से बचने के लिए ही बनाया गया है। साथ ही, यह भी पूछा गया कि इन महत्वपूर्ण खातों को मेटा के 'क्रॉस-चेक' प्रोग्राम में क्यों नहीं रखा गया था, जिसके तहत हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स पर कोई भी एक्शन लेने से पहले मानवीय समीक्षा की जाती है।

नीतियों के अमल में विफलता

लूला डा सिल्वा से जुड़े विज्ञापन खातों के खिलाफ धोखाधड़ी संबंधी नीतियों को लागू करने में मेटा की कार्रवाई को बोर्ड ने एक विफलता करार दिया। बोर्ड का मानना है कि इस मामले को विशेषज्ञ समीक्षकों के पास भेजा जाना चाहिए था।

ओवरसाइट बोर्ड ने चेतावनी दी है कि चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक सामग्री को गलत तरीके से हटाने से राजनीतिक भागीदारी पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। बोर्ड ने कहा, "ऑटोमेटेड एनफोर्समेंट टूल्स को भाषा, बारीकियों और राजनीतिक संदर्भ को ध्यान में रखना चाहिए, ताकि ऐसी राजनीतिक अभिव्यक्ति को बेहतर ढंग से सुरक्षित रखा जा सके जिससे हिंसा न भड़कती हो।"

अधूरे वादे और डेटा की मांग

ये चिंताएं पहली बार नहीं उठाई गई हैं। बोर्ड ने ब्राजील के 2022 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद भी मेटा से अपने इलेक्शन इंटीग्रिटी प्रोग्राम्स के असर को मापने के लिए स्पष्ट मानक तय करने और प्रदर्शन के आंकड़े सार्वजनिक करने को कहा था। मेटा कुछ सामान्य आंकड़े तो जारी करता है, लेकिन बोर्ड के अनुसार, कंपनी ने अब तक ऐसे विस्तृत आंकड़े नहीं दिए हैं जिनसे उसकी प्रवर्तन प्रणालियों की प्रभावशीलता का सही आकलन हो सके।

गौरतलब है कि मेटा ने 2025 में वादा किया था कि वह मॉडरेशन से जुड़ी गलतियों को कम करेगा और चुनावों के दौरान अभिव्यक्ति की अधिक स्वतंत्रता देगा। हालांकि, बोर्ड का कहना है कि हाल की घटनाएं बताती हैं कि इस वादे को पूरा करने के लिए कंपनी को अभी बहुत सुधार करने की जरूरत है।

इनपुट: IANS

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