दिशा सालियान केस: जांच की न्यायिक निगरानी की मांग, अदालत 18 नवंबर को करेगी सुनवाई
सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है, क्योंकि अब इस केस की जांच पर सीधे अदालत की निगरानी की मांग उठी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)…
सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है, क्योंकि अब इस केस की जांच पर सीधे अदालत की निगरानी की मांग उठी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस संबंध में एक याचिका दायर की है, जिस पर 18 नवंबर को सुनवाई होगी। याचिका में मांग की गई है कि मामले की जांच न्यायिक निगरानी में कराई जाए।
यह मांग वकील नीलेश ओझा द्वारा जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने के बाद सामने आई है। उनका तर्क है कि दिशा की मौत को छह साल बीत चुके हैं, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण गवाहों के बयान अभी तक दर्ज नहीं किए गए हैं। उन्होंने दलील दी कि जांच में हो रही देरी के कारण कोर्ट की निगरानी आवश्यक हो गई है।
जांच में देरी और अहम गवाहों के बयान
सुनवाई के दौरान वकील ओझा ने अदालत को बताया कि तीन प्रमुख गवाहों के बयान निर्धारित 60 दिनों की समय-सीमा के भीतर दर्ज नहीं किए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली से जुड़े मोबाइल लोकेशन रिकॉर्ड और अन्य जानकारियां अदालत में जमा करा दी गई हैं, लेकिन दो अधिकारियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया अब भी अधूरी है।
गौरतलब है कि दिशा सालियान, जो दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर भी रह चुकी थीं, की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड में एक इमारत की 14वीं मंजिल से गिरकर मौत हो गई थी। मुंबई पुलिस ने तब इसे आकस्मिक मृत्यु (एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट) का मामला बताकर जांच शुरू की थी और शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या माना था।
पिता के आरोप और HC का पुराना आदेश
दिशा की मौत के ठीक छह दिन बाद 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत भी अपने बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए थे, जिसके बाद दोनों घटनाओं को लेकर कई सवाल उठे थे। हालांकि, दोनों मामलों में किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि नहीं हुई।
दिशा के पिता सतीश सालियान ने जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि उनकी बेटी का यौन उत्पीड़न कर उसकी हत्या की गई। उन्होंने सबूतों को दबाने और जांच में लापरवाही का भी आरोप लगाते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में स्वतंत्र जांच की गुहार लगाई थी। इसी के आधार पर, 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम आदेश देते हुए सीबीआई को मामले के सभी पहलुओं की जांच करने, पिता का बयान दर्ज करने और FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद सीबीआई ने जांच शुरू की थी।
इनपुट: IANS



