NSE क्लोजिंग ऑक्शन के नए नियम से असमंजस, निफ्टी और सेंसेक्स की चाल में बड़े अंतर से ट्रेडर्स हैरान
सोमवार को शेयर बाज़ार में एक ungewöhnliche (असामान्य) घटना देखने को मिली, जब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के निफ्टी और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के सेंसेक्स की क्लोजिंग में करीब 1% का बड़ा अंतर आ गया…
सोमवार को शेयर बाज़ार में एक ungewöhnliche (असामान्य) घटना देखने को मिली, जब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के निफ्टी और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के सेंसेक्स की क्लोजिंग में करीब 1% का बड़ा अंतर आ गया। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह अंतर NSE द्वारा लागू किए गए नए 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) नियमों के बाद सामने आया है, जिसने कई ट्रेडर्स को हैरान कर दिया और सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी।
बाज़ार बंद होने के सामान्य समय, यानी दोपहर 3:15 बजे, निफ्टी 24,589 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। लेकिन नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (जो 3:15 से 3:35 बजे के बीच होता है) के बाद यह अचानक 185 अंक उछलकर 24,774.30 पर बंद हुआ। इसके विपरीत, गिफ्ट निफ्टी 24,650 के आसपास ही था।
आखिरी मिनटों में दिखा भारी उतार-चढ़ाव
इसी तरह का बड़ा बदलाव निफ्टी बैंक में भी दर्ज किया गया। यह 1.7% की बढ़त के साथ 983 पर बंद हुआ, जिसमें अकेले आखिरी कुछ समय में ही 500 अंकों की तेज उछाल देखी गई। इसके ठीक उलट, सेंसेक्स दिन के कारोबार के अंत में 0.7% की बढ़त के साथ 78,639.03 पर बंद हुआ। आमतौर पर, बाज़ार बंद होते समय दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगभग समान बढ़त या गिरावट दिखती है।
सोशल मीडिया पर ट्रेडर्स ने उठाए सवाल
इस अप्रत्याशित अंतर पर कई ट्रेडर्स ने सोशल मीडिया पर चिंता जाहिर की। एक ट्रेडर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि उन्होंने अपने पूरे ट्रेडिंग करियर में दोनों प्रमुख सूचकांकों के बीच ऐसा अंतर कभी नहीं देखा। एक अन्य यूज़र ने कहा कि एनएसई और बीएसई के मुख्य सूचकांकों के बीच का यह अंतर "काफी चौंकाने वाला" है।
क्यों लागू हुए नए नियम?
बाज़ार नियामक सेबी के मुताबिक, यह नया ऑक्शन मैकेनिज्म (नीलामी तंत्र) क्लोजिंग प्राइस के उचित और पारदर्शी निर्धारण को सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका उद्देश्य लिक्विडिटी (तरलता) और सौदों के निष्पादन की दक्षता में सुधार करना भी है।
नए नियमों के तहत, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) वाले सभी स्टॉक्स में नियमित ट्रेडिंग दोपहर 3:15 बजे बंद हो जाती है। इसके बाद, 3:20 से 3:35 बजे के बीच एक विशेष क्लोजिंग ऑक्शन सेशन होता है, जिसमें बचे हुए खरीद/बिक्री के ऑर्डर्स को मैच किया जाता है और अंतिम क्लोजिंग प्राइस तय होता है। इसी नई प्रक्रिया के कारण क्लोजिंग के आंकड़ों में यह बड़ा फेरबदल देखा गया।
इनपुट: IANS



