गुरूवार, 25 जून 2026 · नई दिल्ली
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दिल्ली: यमुना बाजार में DDA की बड़ी कार्रवाई, हाईकोर्ट के आदेश पर 300 से अधिक घरों पर चला बुलडोजर

दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए एक बड़ी अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई शुरू की है। इस अभियान के तहत निगमबोध घाट के पास बसे 300 से अधिक परिवारों के घरों को खाली कराया जा रहा है। प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया का हवाला दिया है, जबकि निवासी विस्थापन के विकल्पों की कमी का आरोप लगा रहे हैं।

दिल्ली: यमुना बाजार में DDA की बड़ी कार्रवाई, हाईकोर्ट के आदेश पर 300 से अधिक घरों पर चला बुलडोजर
यमुना बाजार

मुख्य घटनाक्रम: यमुना बाजार में अतिक्रमण विरोधी अभियान

दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी के यमुना बाजार इलाके में गुरुवार, 25 जून 2026 को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने एक बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू किया। निगमबोध घाट के पास स्थित इस क्षेत्र में प्रशासनिक अमले ने बुलडोजर की मदद से अवैध निर्माणों को हटाने की कवायद शुरू की, जिससे 300 से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं। इस कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए इलाके में भारी पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।

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प्रशासन द्वारा की गई इस कार्रवाई से क्षेत्र में सियासी हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों ने बुधवार रात तक निवासियों को अपने घर खाली करने का समय दिया था, जिसके बाद गुरुवार सुबह से ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। पूरे यमुना बाजार और आसपास के इलाकों में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी है, ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।

प्रशासनिक कार्रवाई का कानूनी आधार

DDA के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए की जा रही है। प्रशासन ने इस अभियान का आधार दिल्ली उच्च न्यायालय के एक आदेश को बताया है। DDA ने 2 जून को एक नोटिस जारी कर क्षेत्र के निवासियों को 23 जून तक जगह खाली करने का निर्देश दिया था। नोटिस में स्पष्ट कहा गया था कि 24 जून से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

इससे पहले, 13 मई को भी आपदा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत यमुना बाजार क्षेत्र को खाली करने के लिए एक नोटिस जारी किया गया था। प्रशासन का दावा है कि निवासियों को पर्याप्त समय दिया गया और कई बार नोटिस जारी किए गए, जिसके बाद ही यह अंतिम कदम उठाया गया है।

निवासियों के दावे और विस्थापन का संकट

दूसरी ओर, इस कार्रवाई से प्रभावित स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के दावों का खंडन किया है। उनका आरोप है कि उन्हें विस्थापन के लिए कोई पर्याप्त विकल्प उपलब्ध नहीं कराया गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस क्षेत्र में करीब 310 से अधिक घर हैं, जहां वे कई पीढ़ियों से रह रहे हैं। अचानक हुई इस कार्रवाई से उनके सामने आवास का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

निवासियों का कहना है कि उन्हें बिना किसी पुनर्वास योजना के बेघर किया जा रहा है। हालांकि, प्रशासन का तर्क है कि अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई सार्वजनिक भूमि को खाली कराने और यमुना बाढ़ क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए आवश्यक है, और यह सब अदालत के निर्देशों के तहत हो रहा है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

अतिक्रमण हटाने की इस बड़ी कार्रवाई को देखते हुए पूरे इलाके को एक किले में तब्दील कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों की कई कंपनियों को भी मौके पर तैनात किया गया है। इलाके की ओर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर बैरिकेड लगाकर यातायात को नियंत्रित किया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हो और किसी भी तरह के विरोध-प्रदर्शन से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

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