दिल्ली: MCD टोल टेंडर में 680 करोड़ के घोटाले का आरोप, AAP ने की CBI जांच की मांग
दिल्ली नगर निगम (MCD) एक बार फिर टोल टैक्स टेंडर को लेकर विवादों में घिर गया है। आम आदमी पार्टी (आप) ने भाजपा शासित निगम पर टेंडर प्रक्रिया में धांधली कर 680 करोड़ रुपये का घोटाला करने का आरोप लगाया…
दिल्ली नगर निगम (MCD) एक बार फिर टोल टैक्स टेंडर को लेकर विवादों में घिर गया है। आम आदमी पार्टी (आप) ने भाजपा शासित निगम पर टेंडर प्रक्रिया में धांधली कर 680 करोड़ रुपये का घोटाला करने का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, 'आप' ने इस पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने और मौजूदा टेंडर को तत्काल रद्द करने की मांग की है।
'आप' नेताओं का आरोप है कि एमसीडी ने जानबूझकर सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी को तकनीकी आधार पर बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बजाय, एक ऐसी कंपनी को ठेका दिया गया जिसने 680 करोड़ रुपये कम की बोली लगाई थी। पार्टी ने दावा किया है कि इस कंपनी को हाल ही में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा ब्लैकलिस्ट भी किया गया था।
ठेका देने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
कोंडली से विधायक कुलदीप कुमार ने आरोप लगाया कि एमसीडी ने लगभग 5500 करोड़ रुपये के टोल कलेक्शन का टेंडर जारी किया, लेकिन इस प्रक्रिया के लिए स्टैंडिंग कमेटी से अनिवार्य मंजूरी नहीं ली गई। उन्होंने दावा किया, "टेंडर की शर्तों में जानबूझकर ऐसे प्रावधान जोड़े गए, जिससे केवल एक विशेष कंपनी को लाभ मिल सके।"
उन्होंने विस्तार से बताया कि सबसे ऊंची बोली 5500 करोड़ रुपये की थी, जिसे तकनीकी कारणों से खारिज कर दिया गया। इसके बाद 4820 करोड़ रुपये की बोली लगाने वाली कंपनी सहकार ग्लोबल लिमिटेड को ठेका दे दिया गया, जिससे निगम को सीधे तौर पर 680 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हुआ।
ब्लैकलिस्टेड कंपनी को ठेका देने का आरोप
आम आदमी पार्टी ने यह भी कहा कि सहकार ग्लोबल लिमिटेड कई वर्षों से एमसीडी में टोल कलेक्शन का काम कर रही है। 'आप' नेताओं के अनुसार, NHAI द्वारा ब्लैकलिस्ट और डिबार किए जाने के बावजूद निगम ने उसी कंपनी को फिर से ठेका दे दिया।
एमसीडी के सह-प्रभारी प्रवीण कुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा ने प्रतिस्पर्धा को सीमित करने के लिए टेंडर में 122 लेन के सिंगल कॉन्ट्रैक्ट और 24 महीने की अवधि जैसी पुरानी शर्तें फिर से जोड़ दीं। उन्होंने कहा कि इन शर्तों को पहले हटा दिया गया था ताकि अधिक कंपनियां हिस्सा ले सकें और निगम का राजस्व बढ़ सके।
वित्तीय संकट के बीच राजस्व का नुकसान
पार्टी की सह-प्रभारी प्रीति डोगरा ने कहा कि एमसीडी पहले से ही गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है और कर्मचारियों को वेतन देने तक के लिए पैसे नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में ज़्यादा राजस्व वाली बोली को ठुकराकर कम बोली वाली कंपनी को ठेका देना गंभीर संदेह पैदा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने सिर्फ भ्रष्टाचार के लिए निगम पर कब्जा किया है। वहीं, निगम पार्षद राजीव चौधरी ने दावा किया कि इसी तरह के भ्रष्टाचार के कारण पार्षदों को विकास कार्यों के लिए फंड नहीं मिल पा रहा है।
इनपुट: IANS



