सोमवार, 13 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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दक्षिण चीन सागर पर बयानबाजी तेज: जापान पर भड़का चीन, दूतावास अधिकारी को तलब कर जताया कड़ा विरोध

दक्षिण चीन सागर पर अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के 2016 के एक फैसले को लेकर चीन और जापान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। जापान समेत 14 देशों द्वारा इस फैसले के समर्थन में एक संयुक्त बयान जारी करने के

दक्षिण चीन सागर पर बयानबाजी तेज: जापान पर भड़का चीन, दूतावास अधिकारी को तलब कर जताया कड़ा विरोध
(फोटो: IANS)

दक्षिण चीन सागर पर अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के 2016 के एक फैसले को लेकर चीन और जापान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। जापान समेत 14 देशों द्वारा इस फैसले के समर्थन में एक संयुक्त बयान जारी करने के बाद बीजिंग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने न केवल बयान की निंदा की, बल्कि टोक्यो स्थित अपने दूतावास के एक वरिष्ठ अधिकारी को तलब कर आधिकारिक विरोध भी दर्ज कराया।

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यह पूरा विवाद 12 जुलाई 2016 को हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय द्वारा दिए गए एक फैसले से जुड़ा है। उस फैसले में कहा गया था कि दक्षिण चीन सागर में चीन के तथाकथित "नाइन-डैश लाइन" पर आधारित दावों का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है। चीन ने इस फैसले को कभी स्वीकार नहीं किया और आज भी इसे "बेकार कागज का टुकड़ा" कहकर खारिज करता है।

संयुक्त बयान और चीन की प्रतिक्रिया

हाल ही में, जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, कनाडा, फिलीपींस और कई यूरोपीय देशों सहित कुल 14 राष्ट्रों ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इस बयान में 2016 के फैसले को अंतिम, कानूनी रूप से बाध्यकारी और चीन तथा फिलीपींस के बीच समुद्री दावों पर निर्णायक बताया गया। इसी बयान के बाद चीन ने जापान पर क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को कमजोर करने का आरोप लगाया। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि बाहरी शक्तियां इस फैसले का इस्तेमाल दक्षिण चीन सागर में हस्तक्षेप करने और अस्थिरता पैदा करने के बहाने के तौर पर कर रही हैं।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने विशेष रूप से जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी के बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि जापान इस विवाद का पक्षकार नहीं है और उसे चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता पर टिप्पणी का कोई अधिकार नहीं है। चीन का आरोप है कि जापान तथ्यों को तोड़-मरोड़ रहा है और फिलीपींस के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाकर तनाव को हवा दे रहा है।

दोनों पक्षों का अपना-अपना रुख

चीन दक्षिण चीन सागर के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से पर अपने ऐतिहासिक अधिकार का दावा करता है, जबकि वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और इंडोनेशिया भी इस पर दावा करते हैं। अपने दावे को पुख्ता करने के लिए चीन ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमें इस क्षेत्र पर उसके हक को दर्शाया गया है।

वहीं, जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने अपने देश के रुख का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जापान हमेशा से समुद्री क्षेत्रों में कानून के शासन को बनाए रखने का समर्थन करता रहा है। किहारा के अनुसार, 14 देशों का यह संयुक्त बयान एक शांतिपूर्ण, स्थिर और मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को ही दोहराता है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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