कांग्रेस कार्यसमिति ने मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा मांगा, वोटर लिस्ट से हटाए गए 13.3 करोड़ नाम वापस जोड़ने का प्रस्ताव पारित
कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रस्ताव पारित कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पार्टी ने यह मांग उन…
कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रस्ताव पारित कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पार्टी ने यह मांग उन हालिया रिपोर्टों के मद्देनजर की है, जिनसे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि निर्वाचन आयोग की मिलीभगत से संघ-भाजपा ने पूरी चुनावी प्रक्रिया पर कब्जा कर लिया है।
कार्यसमिति ने अपनी बैठक में तीन प्रमुख मांगें रखीं: मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा, देश भर में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर तत्काल रोक और मतदाता सूचियों से हटाए गए 13 करोड़ 30 लाख नामों को तुरंत वापस जोड़ना।
चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर आरोप
प्रस्ताव में कहा गया है कि हालिया खुलासों से राहुल गांधी द्वारा लगातार व्यक्त की जा रही आशंकाओं की पुष्टि हुई है। उन्होंने 'वोट चोरी' के माध्यम से भारत की चुनावी प्रक्रिया को सुनियोजित ढंग से कमजोर किए जाने की ओर ध्यान आकर्षित किया था। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची पर नियंत्रण भाजपा समर्थित कुछ अधिकारियों के हाथों में केंद्रित कर दिया गया है, जो निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता के लिए एक बड़ा खतरा है। CWC के अनुसार, इन रिपोर्टों से यह संकेत मिलता है कि निर्वाचन आयोग एक व्यक्ति के नियंत्रण वाली संस्था में बदल गया है, जहां मुख्य चुनाव आयुक्त अन्य आयुक्तों से सलाह किए बिना फैसले ले रहे हैं।
मतदाता सूची और SIR पर सवाल
कांग्रेस कार्यसमिति ने SIR की संवैधानिक वैधता पर गहरी चिंता जताई, जिसके तहत अब तक 13.30 करोड़ भारतीयों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, यह प्रक्रिया नागरिकों पर अपनी पात्रता साबित करने का बोझ डालती है और बड़े पैमाने पर लोगों को मनमाने ढंग से मतदान के अधिकार से वंचित करती है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 326 (सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार) का उल्लंघन है। रिपोर्टों के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने दस महीनों में 14 आपत्तियां दर्ज कराईं और SIR में इस्तेमाल हो रहे फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को 'अनधिकृत और अवैध' बताया था।
कांग्रेस का देशव्यापी अभियान
पार्टी ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे के मार्गदर्शन और राहुल गांधी के नेतृत्व में इस लड़ाई को पहले ही जनता के बीच ले जाया जा चुका है। इसके तहत बिहार में 'वोटर अधिकार यात्रा', कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा में प्रेस कॉन्फ्रेंस, देशव्यापी 'वोट चोरी' अभियान और संसद में इंडिया ब्लॉक के विरोध-प्रदर्शन जैसे कदम उठाए गए हैं। CWC का मानना है कि जो पहले राहुल गांधी की अकेली चेतावनी मानी जा रही थी, वह अब चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की राष्ट्रीय मांग बन चुकी है।
इनपुट: IANS



