छत्तीसगढ़: BJP विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन, शिक्षा जगत से राजनीति में बनाई थी बड़ी पहचान
छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक वरिष्ठ नेता और अहिवारा सीट से विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन हो गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और…
छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक वरिष्ठ नेता और अहिवारा सीट से विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन हो गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से राज्य के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर है।
कोर्सेवाड़ा के निधन की खबर के बाद दुर्ग-भिलाई और राजधानी रायपुर समेत पूरे अहिवारा विधानसभा क्षेत्र में उनके समर्थकों और शुभचिंतकों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। 12 अगस्त 1948 को जन्मे कोर्सेवाड़ा ने राजनीति में आने से पहले शिक्षा के क्षेत्र में एक लंबी और सम्मानित पारी खेली थी।
शिक्षक से विधायक तक का सफर
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा ने रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर और बीएड की डिग्री हासिल की थी। उन्होंने एक लेक्चरर के रूप में अपनी सेवाएं दीं और 1998 में सेवानिवृत्त होने के बाद सक्रिय राजनीति में कदम रखा। राजनीति में उनका प्रवेश 1999 में दुर्ग के तत्कालीन सांसद के निजी सहायक के रूप में काम करने से शुरू हुआ, जिससे उन्हें सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिला।
चुनावी और राजनीतिक करियर
कोर्सेवाड़ा ने पहली बार 2008 में भाजपा के टिकट पर अहिवारा विधानसभा सीट से चुनाव जीता और विधानसभा पहुंचे। हालांकि, 2013 और 2018 के चुनावों में पार्टी यह सीट हार गई थी। भाजपा ने 2023 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर उन पर भरोसा जताया और उन्होंने शानदार वापसी की। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार निर्मल कोसरे को 25,263 मतों के बड़े अंतर से हराया। इस चुनाव में कोर्सेवाड़ा को 96,717 वोट मिले, जबकि निर्मल कोसरे को 71,454 मत प्राप्त हुए थे।
मिले थे कई महत्वपूर्ण पद
अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। 2010 में उन्हें छत्तीसगढ़ विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया था और इस पद पर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। 2023 में दूसरी बार विधायक चुने जाने के बाद, उन्हें विधानसभा की पुस्तकालय समिति सहित अन्य समितियों में सदस्य और पदाधिकारी नियुक्त किया गया। इसके अलावा, अक्टूबर 2025 में छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष भी नियुक्त किया था, जिसका कार्यभार उन्होंने नवंबर 2025 में संभाला था। उनके निधन को छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।
इनपुट: IANS



