अदालती कार्यवाही की रिकॉर्डिंग का दुरुपयोग: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा—उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई का नियम बनाएँ
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के अनधिकृत इस्तेमाल और व्यावसायिक शोषण को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को एक सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश…
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के अनधिकृत इस्तेमाल और व्यावसायिक शोषण को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को एक सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह इस संबंध में तैयार हो रहे नीतिगत ढाँचे में ऐसे उपाय भी शामिल करे, जिनसे नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह आदेश दिया। पीठ ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि इस साल जुलाई में जारी किए गए अंतरिम निर्देशों का सख्ती से पालन हो।
नीति निर्माण और मौजूदा उल्लंघन
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग के उपयोग को विनियमित करने के लिए एक नीति तैयार कर रही है। इसके लिए विभिन्न उच्च न्यायालयों और विधि समुदाय के सदस्यों से मिले सुझावों पर विचार किया जा रहा है। मेहता ने यह भी जानकारी दी कि कुछ लोग पहले से लागू अंतरिम प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहे हैं और ऐसी सामग्री को हटा दिया जाना चाहिए।
इस पर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सहमति जताते हुए कहा कि निर्देशों का प्रभावी ढंग से लागू होना ज़रूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित नीति में उन लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए जो इन नियमों का पालन नहीं करते। कार्यवाही के दौरान डिजिटल वॉटरमार्किंग और प्रमाणित रिकॉर्डिंग जैसे उपायों पर भी दलीलें सुनी गईं।
पहले से लागू हैं ये प्रतिबंध
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही एक अंतरिम आदेश जारी कर न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इसके तहत, सुप्रीम कोर्ट के महासचिव या संबंधित उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति के बिना ऐसी रिकॉर्डिंग को किसी भी सोशल मीडिया या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करने, प्रसारित करने, बदलने या उसका व्यावसायिक उपयोग करने पर प्रतिबंध है।
हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया था कि यह प्रतिबंध मान्यता प्राप्त समाचार माध्यमों द्वारा की जाने वाली रिपोर्टिंग को प्रभावित नहीं करेंगे। मीडिया संस्थान अदालती घटनाक्रमों की रिपोर्टिंग जारी रख सकते हैं, लेकिन वे अपनी कवरेज में कार्यवाही के ऑडियो या वीडियो क्लिप का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
इनपुट: IANS



