PNB बैंक की ग्रेटर नोएडा शाखा में 10 करोड़ से ज़्यादा की धोखाधड़ी, CBI ने दर्ज की FIR
ग्रेटर नोएडा स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक शाखा में ग्राहकों के खातों से करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय जांच…
ग्रेटर नोएडा स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक शाखा में ग्राहकों के खातों से करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में बैंक की एक महिला कर्मचारी समेत कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। शुरुआती जांच में करीब 10.24 करोड़ रुपये की हेराफेरी का पता चला है, जो पिछले तीन सालों से चल रही थी।
आरोप है कि बैंक की महिला कर्मचारी दीपांशी ने अन्य अधिकारियों के यूजर आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग किया। उसने ग्राहकों के खातों से उनकी जानकारी के बिना पैसे निकालकर अपने सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर कर दिए। बैंक की शिकायत के आधार पर, सीबीआई की गाजियाबाद स्थित एंटी करप्शन ब्रांच ने गुरुवार को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच का दायरा और रकम बढ़ सकती है
PNB ने अपनी शिकायत में बताया है कि अब तक की छानबीन में अलग-अलग ग्राहकों के खातों से 10.24 करोड़ रुपये की अनधिकृत निकासी की पुष्टि हुई है। एजेंसी के हवाले से यह भी बताया गया है कि यह धोखाधड़ी दीपांशी ने अशुतोष पाठक, प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी, सरोज देवी और अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर की।
बैंक अधिकारियों का कहना है कि सभी प्रभावित खातों के लेनदेन का मिलान अभी जारी है। इसलिए, जांच आगे बढ़ने पर धोखाधड़ी की कुल रकम और लाभार्थियों की संख्या में बदलाव हो सकता है।
FIR में गंभीर धाराएं, FD की भी जांच
CBI ने FIR में बैंक कर्मचारी दीपांशी, अशुतोष पाठक और अन्य निजी व अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी शामिल हैं।
इसके अलावा, बैंक ने जांच एजेंसी को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की एक सूची भी सौंपी है। इसमें 49 FD और उन्हें बंद करने के बाद ट्रांसफर की गई रकम का ब्योरा है, जो 7023.77 लाख रुपये बताई गई है। यह आंकड़ा 10.24 करोड़ की कथित धोखाधड़ी से अलग है, और दोनों के बीच का संबंध जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
इनपुट: IANS



