CAG रिपोर्ट: झारखंड में वित्तीय कुप्रबंधन और योजनाओं में विफलता पर हेमंत सरकार से बाबूलाल मरांडी ने मांगे जवाब
झारखंड में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया है। बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने नियंत्रक एवं महालेखा…
झारखंड में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया है। बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राज्य की कई महत्वपूर्ण योजनाएं ज़मीन पर उतरने में विफल रही हैं, जिससे पूरा राज्य वित्तीय अव्यवस्था का शिकार हो गया है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मरांडी ने भाजपा के प्रदेश कार्यालय में बोलते हुए कहा कि CAG के निष्कर्ष सरकार की प्रशासनिक और वित्तीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने सरकार से रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर जवाब देने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
प्रमुख योजनाओं में खामियां
मरांडी ने CAG रिपोर्ट के आधार पर कई केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में पाई गई कमियों को उजागर किया। उन्होंने दावा किया कि जल जीवन मिशन में निविदा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। एक ऐसे ठेकेदार को अलग-अलग निविदाओं के माध्यम से लगभग 148 करोड़ रुपये के काम दिए गए, जिसकी निविदा क्षमता नकारात्मक थी। रांची-पूर्वी और खूंटी डिवीजनों की कुछ निविदाओं में केवल दो बोलीदाताओं ने हिस्सा लिया और जांच में पाया गया कि उनके डिमांड ड्राफ्ट एक-दूसरे द्वारा खरीदे गए थे।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण को लेकर उन्होंने कहा कि लक्ष्य और लाभार्थियों को तय करने में देरी के कारण 22.34 लाख पात्र परिवारों में से 6.32 लाख परिवार इस योजना का लाभ पाने से वंचित रह गए। इसी तरह, मनरेगा में, जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को समय पर रोजगार देना है, राशि 40 से 55 दिनों की देरी से जारी की गई। मरांडी ने यह भी दावा किया कि CAG को इस योजना के तहत ऐसे खर्चे भी मिले जो स्वीकार्य नहीं थे।
राज्य की वित्तीय स्थिति पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने राज्य की वित्तीय सेहत पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2025 तक 1,60,565 करोड़ रुपये के खर्च से जुड़े उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित थे। इसके अलावा, वर्ष 2024-25 के 1,50,938.84 करोड़ रुपये के बजट में से 31,110 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं हो सके।
मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि 13 केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए मिली 1,916.63 करोड़ रुपये की राशि में से सरकार 596.02 करोड़ रुपये खर्च करने में विफल रही। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े सिर्फ कुछ योजनाओं की कमियां नहीं दिखाते, बल्कि पूरी सरकारी कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
इनपुट: IANS



