बुधवार, 12 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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गिग वर्कर्स के लिए रिटायरमेंट प्लानिंग हुई आसान, सिर्फ़ ₹99 से शुरू कर सकते हैं NPS में निवेश

भारत में ज़ोमैटो, स्विगी और अर्बन कंपनी जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए काम करने वाले लाखों गिग वर्कर्स अब महज़ 99 रुपये की छोटी रकम से अपना रिटायरमेंट फंड बनाना शुरू कर सकते हैं। पेंशन फंड नियामक और विकास…

गिग वर्कर्स के लिए रिटायरमेंट प्लानिंग हुई आसान, सिर्फ़ ₹99 से शुरू कर सकते हैं NPS में निवेश
(फोटो: IANS)

भारत में ज़ोमैटो, स्विगी और अर्बन कंपनी जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए काम करने वाले लाखों गिग वर्कर्स अब महज़ 99 रुपये की छोटी रकम से अपना रिटायरमेंट फंड बनाना शुरू कर सकते हैं। पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत यह विशेष सुविधा दी है, ताकि असंगठित क्षेत्र के इन कर्मचारियों को भी सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सके।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, PFRDA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के माध्यम से इस लचीले निवेश विकल्प की जानकारी दी। नियामक ने स्पष्ट किया कि गिग वर्कर्स के लिए योगदान की कोई न्यूनतम या अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है, जिससे वे अपनी सुविधानुसार और कमाई के हिसाब से निवेश कर सकते हैं। पोस्ट में कहा गया, "आपका काम बेशक, आपकी अगली बुकिंग पर निर्भर करता है, लेकिन आपका रिटायरमेंट नहीं।"

क्या है यह विशेष NPS मॉडल?

PFRDA ने इस मॉडल को 'एनपीएस ई-श्रमिक (प्लेटफॉर्म सर्विस पार्टनर)' नाम दिया है, जिसे 29 अक्टूबर, 2025 के एक सर्कुलर के ज़रिए पेश किया गया था। इसका खास मकसद उन कर्मचारियों को एनपीएस के दायरे में लाना है जो किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राहकों को अपनी सेवाएं देते हैं। यह मॉडल काफी हद तक कॉरपोरेट NPS मॉडल जैसा ही है, लेकिन इसे गिग वर्कर्स की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

योगदान और पंजीकरण की प्रक्रिया

इस फ्रेमवर्क के तहत योगदान करने के कई विकल्प मौजूद हैं। प्लेटफॉर्म और वर्कर मिलकर योगदान कर सकते हैं, सिर्फ वर्कर खुद कर सकता है, या वर्कर की तरफ से पूरा योगदान एग्रीगेटर या प्लेटफॉर्म भी कर सकता है। हालांकि, PFRDA ने कोई सीमा तय नहीं की है, लेकिन प्लेटफॉर्म और कर्मचारी आपसी सहमति से हर योगदान के लिए एक न्यूनतम राशि तय कर सकते हैं।

एक खास बात यह है कि प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर्स को PFRDA के साथ अलग से रजिस्टर करने की ज़रूरत नहीं होगी। वे सीधे 'पॉइंट्स ऑफ प्रेजेंस' (PoP) के साथ समझौता करके अपने कर्मचारियों का पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होती है, जिसमें आधार-आधारित e-KYC के ज़रिए कर्मचारी की जानकारी सत्यापित की जाती है और फिर एक 'परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर' (PRAN) जारी किया जाता है। शुरुआत में निवेश स्कीम का चुनाव प्लेटफॉर्म कर सकता है, लेकिन बाद में कर्मचारी के पास इसे बदलने का पूरा अधिकार होता है।

इनपुट: IANS

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