FCRA बिल पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव, सरकार बोली- JPC में होगी व्यापक चर्चा
लोकसभा में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजे जाने पर सरकार और विपक्षी दलों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। सरकार ने इस कदम को व्यापक चर्चा सुनिश्चित करने का…
लोकसभा में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजे जाने पर सरकार और विपक्षी दलों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। सरकार ने इस कदम को व्यापक चर्चा सुनिश्चित करने का एक ज़रिया बताया है, जबकि विपक्ष ने सरकार की मंशा और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मुद्दे पर दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे, जिससे सदन में टकराव की स्थिति बन गई।
सरकार का पक्ष: JPC से मज़बूत होगा बिल
सरकार के इस फ़ैसले का बचाव करते हुए भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि एफसीआरए एक महत्वपूर्ण बिल है और इसे जेपीसी को भेजना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, "इस पर व्यापक बातचीत हो सके और संबंधित लोगों की राय ली जा सके। मुझे यकीन है कि जेपीसी की प्रक्रिया से यह बिल और भी मजबूत और बेहतर बनेगा, क्योंकि इसमें संबंधित लोगों से बातचीत होगी, ज्यादा आम सहमति बनेगी और बिल को और व्यापक बनाने के लिए विशेषज्ञों से भी सलाह ली जाएगी।"
विपक्ष के आरोप: प्रक्रिया और मंशा पर सवाल
विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम को जल्दबाज़ी में उठाया गया और पारदर्शिता के बिना बताया है। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा, "यह बिल आखिरी समय में लाया गया है, गुरुवार को सत्र खत्म होने वाला है। बुधवार दोपहर 12 बजे हमें लोकसभा सचिवालय से संदेश मिला कि अमित शाह यह बिल पेश कर रहे हैं। लेकिन अमित शाह आज मौजूद भी नहीं हैं। राज्य मंत्री ने इसे जेपीसी को भेजने का प्रस्ताव रखा। हंगामे के बीच बिल को जेपीसी को भेज रहे हैं।"
वहीं, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकार की मंशा पर निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "एफसीआरए बिल का सभी विपक्षी पार्टियां एकमत होकर विरोध कर रही हैं। यह बिल इसलिए लाया गया है ताकि भाजपा यह पक्का कर सके कि सारी फंडिंग सिर्फ आरएसएस को ही मिले।" उन्होंने आरएसएस की फंडिंग और ऑडिट पर भी सवाल उठाए। मोइत्रा ने आगे आरोप लगाया, "एफसीआरए का मकसद हर एनजीओ और हर चैरिटेबल ऑर्गनाइजेशन की फंडिंग रोकना है, खासकर उन संगठनों की जो अलग-अलग धर्मों, जैसे ईसाई या मुस्लिम धर्म से जुड़े हैं। जो भी संगठन आरएसएस से जुड़ा नहीं है, उसकी फंडिंग रोक दी जाएगी।"
BJD ने किया फ़ैसले का स्वागत
इस टकराव के बीच बीजू जनता दल (BJD) ने सरकार के फ़ैसले का समर्थन किया है। बीजद सांसद सस्मित पात्रा ने कहा, "मैं सरकार के एफसीआरए बिल को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने के फैसले का स्वागत करता हूं।" उन्होंने बताया कि उन्होंने दो दिन पहले ही यह मांग की थी कि बिल की खूबियों की जांच के लिए जेपीसी ही सही मंच है। पात्रा के अनुसार, "ईसाई समुदाय और अल्पसंख्यक समुदायों ने एफसीआरए बिल को जल्दबाजी में पास करने को लेकर चिंता जताई थी, और इसलिए, संयुक्त संसदीय समिति की लगातार मांग की जा रही थी।"
इनपुट: IANS



