पंजाब में ED की छापेमारी के खिलाफ हाईकोर्ट पहुँची मान सरकार, कोर्ट ने निगरानी के लिए वारंट ऑफिसर नियुक्त किया
पंजाब में ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमएडीए) समेत कई जगहों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चल रही छापेमारी को राज्य सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। समाचार एजेंसी IANS…
पंजाब में ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमएडीए) समेत कई जगहों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चल रही छापेमारी को राज्य सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इन कार्रवाइयों की निगरानी के लिए एक वारंट ऑफिसर की नियुक्ति की है, जिन्हें गुरुवार दोपहर तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
यह मामला बुधवार देर रात जस्टिस संजय वशिष्ठ के सामने तत्काल सुनवाई के लिए रखा गया, जिसकी कार्यवाही गुरुवार सुबह तक चली। अदालत में राज्य सरकार ने दलील दी कि ईडी की तलाशी और जब्ती की कार्रवाई के कारण सरकारी कामकाज ठप हो गया है और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को कथित तौर पर हिरासत में भी लिया गया है।
छापेमारी की वजह और जांच का दायरा
प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही ये छापेमारी मंगलवार को मोहाली स्थित जीएमएडीए मुख्यालय से शुरू हुई थी। इसके बाद जांच का दायरा पंजाब, चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली तक फैल गया। एजेंसी मुख्य रूप से जमीन अधिग्रहण, भूमि उपयोग में बदलाव और निजी रियल एस्टेट कंपनियों को दी गई वित्तीय रियायतों में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है।
ईडी का आरोप है कि इन मामलों में निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुँचाया गया, जिससे सरकारी खजाने को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान है। इस जांच के दायरे में तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियाँ भी शामिल हैं।
हाईकोर्ट का आदेश और वारंट ऑफिसर की भूमिका
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने एक वरिष्ठ रैंक के वारंट ऑफिसर को नियुक्त किया, जिन्हें किसी भी समय छापेमारी वाली जगहों पर जाने का अधिकार दिया गया है। अदालत ने चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक और मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को वारंट ऑफिसर को आवश्यक सुरक्षा मुहैया कराने का भी निर्देश दिया है। ऑफिसर गुरुवार दोपहर 2 बजे तक कोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेंगे।
आप सरकार का केंद्र पर हमला
इस कार्रवाई को लेकर पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) और केंद्र की भाजपा सरकार के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। 'आप' ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर पंजाब के अधिकारियों पर दबाव बना रही है। बुधवार को एक बयान में पार्टी ने कहा कि भाजपा पंजाब में अपनी राजनीतिक जमीन खो चुकी है और अब "पंजाबियों" तथा 'आप' नेताओं को "डराने-धमकाने" के लिए केंद्रीय एजेंसियों का सहारा ले रही है।
पार्टी ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार जीएमएडीए के काम में बाधा डालकर भगवंत मान सरकार की 'मावां-धीयां सत्कार योजना' जैसी कल्याणकारी योजनाओं को रोकने की कोशिश कर रही है। 'आप' ने कहा, "भाजपा चाहे जितनी भी एजेंसियां तैनात कर ले, लेकिन छापेमारी या डराने-धमकाने की कोशिशें पंजाब के लोगों के हौसले को कम नहीं कर सकतीं।"
इनपुट: IANS



