गुरूवार, 24 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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NSE की शेयर बाजार में फीकी एंट्री, इश्यू प्राइस से सिर्फ 0.84% प्रीमियम पर हुई लिस्टिंग

भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), ने गुरुवार को शेयर बाजार में बेहद मामूली बढ़त के साथ शुरुआत की। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर इसका शेयर 1,800 रुपये पर लिस्ट हुआ, जो कि…

NSE की शेयर बाजार में फीकी एंट्री, इश्यू प्राइस से सिर्फ 0.84% प्रीमियम पर हुई लिस्टिंग
(फोटो: IANS)

भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), ने गुरुवार को शेयर बाजार में बेहद मामूली बढ़त के साथ शुरुआत की। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर इसका शेयर 1,800 रुपये पर लिस्ट हुआ, जो कि 1,785 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले सिर्फ 0.84 प्रतिशत का प्रीमियम है। यह उन निवेशकों के लिए निराशाजनक रहा, जो एक मजबूत लिस्टिंग की उम्मीद कर रहे थे।

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समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लिस्टिंग से ठीक पहले ग्रे मार्केट में इसके प्रति उत्साह काफी कम हो गया था। बुधवार को इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) घटकर कथित तौर पर सिर्फ 43 रुपये प्रति शेयर रह गया था। जबकि IPO खुलने से पहले यह प्रीमियम लगभग 200 रुपये पर था, जिससे 8% से ज्यादा के लिस्टिंग गेन का अनुमान लगाया जा रहा था।

IPO को मिला था अच्छा रिस्पॉन्स

17 से 21 सितंबर तक खुले इस IPO को निवेशकों की तरफ से अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी और यह कुल 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इस इश्यू का आकार 22,568.94 करोड़ रुपये था, जिसके बदले निवेशकों ने 90,287.33 करोड़ रुपये की बोलियां लगाई थीं। इसका प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया गया था। यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) था, जिसमें मौजूदा शेयरधारकों ने 12.64 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री की।

बाजार में NSE की मजबूत पकड़

यह साल 2024 में हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के IPO के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू था। NSE अपनी आय के लिए काफी हद तक ट्रांजैक्शन चार्ज पर निर्भर है। वित्त वर्ष 2026 में इसके परिचालन से होने वाले राजस्व में ट्रांजैक्शन चार्ज का हिस्सा 78.65% था, जिसमें अकेले ऑप्शंस ट्रेडिंग की हिस्सेदारी 60% से अधिक थी।

बाजार के कई सेगमेंट में NSE का दबदबा कायम है। वित्त वर्ष 2026 में इक्विटी कैश सेगमेंट में इसकी बाजार हिस्सेदारी लगभग 93%, इक्विटी फ्यूचर्स में 99.79% और करेंसी फ्यूचर्स में 99.48% रही। हालांकि, प्रीमियम टर्नओवर के आधार पर इक्विटी ऑप्शंस में इसकी हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2026 में 74.71% से घटकर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 68.48% रह गई।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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