होलिका की कितनी परिक्रमा और किस तरह से करनी चाहिए दाएं से या बाएं से
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। होलिका की परिक्रमा तीन, पांच या सात बार बाएं से दाएं की जाती है, जिसमें सूत के धागे का उपयोग किया जाता है।
भारत की अध्यक्षता में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन के तहत सदस्य देशों के संस्कृति मंत्रियों और अधिकारियों का जमावड़ा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हो रहा है। बुधवार से शुरू हो रही इस तीन दिवसीय बैठक का…
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। होलिका की परिक्रमा तीन, पांच या सात बार बाएं से दाएं की जाती है, जिसमें सूत के धागे का उपयोग किया जाता है।
रंगो का त्योहार होली बस कुछ ही दिन दूर है। हिन्दू धर्म में होली का बहुत महत्व है, बुराई पर अच्छाई की जीत के इस पर्व में जितना महत्व रंगों का है, उतना ही होलिका…
मध्यप्रदेश के प्रमुख त्यौहारों में लोकरंग समारोह, खुजराहो और मालवा उत्सव शामिल हैं जो देश की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं और लोक नृत्य, संगीत तथा आदिवासी हस्तशिल्प का प्रदर्शन करते हैं।
पिछले 100 सालों में होली कई बार फरवरी में मनाई गई है। 1945, 1964 और 1972 में होलिका दहन और होली दोनों फरवरी के महीने में आए थे।
आज हम आपको इतिहास से जुड़े हुए एक रोचक सवाल के बारे में बताते हैं. जिसका जवाब भी आपको यहां मिल जाएगा.
तीर्थ यात्रियों को एक बड़ा तोहफा देते हए रेलवे द्वारा 'Shri Ramayana Express' को 28 मार्च से चलाए जाने की बात सामने आई है.
रंगों का त्योहार होली का अनूठा स्थान है। होली का हिन्दू धर्म में काफी महत्व है। यह रंग, भाईचारा और अखंडता के प्रतीक के तौर पर भारतवर्ष में विख्यात है।
कहते हैं जब किसी को कहीं चैन नहीं मिलता है तो वह काशी आता है। वैसे तो काशी का नाम बनारस और वाराणसी है लेकिन जब बात धार्मिक होती है तो इसे काशी कहके ही पुकारा…