बुरहानपुर: विश्वकर्मा योजना में कारीगरों को मिला AI का प्रशिक्षण, 3200 से ज़्यादा लोग हुए प्रशिक्षित
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत हुए इस आयोजन में…
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत हुए इस आयोजन में कारीगरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी दी गई, ताकि वे अपने उत्पादों की डिज़ाइन, पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग को बेहतर बना सकें।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, लालबाग हायर सेकेंडरी स्कूल में हुए इस एक-दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय और ज़िला प्रशासन ने मिलकर किया। इसमें योजना के लाभार्थियों को डिजिटल कारोबार और स्वरोज़गार के नए अवसरों के बारे में विस्तार से बताया गया।
प्रशिक्षण केंद्र ने हासिल किया लक्ष्य
कार्यक्रम में मौजूद मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद ने बताया कि बुरहानपुर प्रशिक्षण केंद्र को 3,300 लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य मिला था, जिसमें से 3,207 लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने दावा किया, "प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया है।" उन्होंने यह भी कहा कि यह केंद्र पूरे मध्य प्रदेश में पहले स्थान पर है और लगभग सभी लक्ष्य पूरे कर लिए गए हैं।
सरकारी योजनाओं और ऋण की जानकारी
इस आयोजन में बड़ी संख्या में कारीगर शामिल हुए, जिन्हें बैंक ऋण, टूलकिट, कौशल प्रशिक्षण और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने उन्हें ई-कॉमर्स, उद्यमिता, निर्यात और वित्तीय सहायता के साथ-साथ केंद्र व राज्य सरकार की अन्य योजनाओं के बारे में भी बताया। इस दौरान कई लाभार्थियों को टूलकिट और ऋण स्वीकृति पत्र भी सौंपे गए।
योजना से आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएँ
प्रशिक्षण का लाभ ले चुकी महिलाओं ने भी अपने सकारात्मक अनुभव साझा किए। लाभार्थी ज्योति ने बताया कि योजना के तहत आवेदन करने के बाद उन्हें प्रशिक्षण के दौरान आर्थिक सहायता मिली और बाद में एक लाख रुपए का ऋण भी स्वीकृत हुआ। उन्होंने कहा कि इस मदद से अब वे अपने काम को आगे बढ़ा पाएंगी।
एक अन्य लाभार्थी सीमा चौधरी के मुताबिक, योजना से उन्हें न केवल प्रशिक्षण मिला, बल्कि आत्मनिर्भर बनने के लिए ज़रूरी मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल से पारंपरिक कारीगरों को नई पहचान मिल रही है।
इनपुट: IANS



