बिहार विधानसभा: स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी पर मुख्यमंत्री का दखल, एक महीने में भर्ती का दिया निर्देश
बिहार के बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों के हजारों पद खाली होने का मामला मंगलवार को विधानसभा में जोर-शोर से उठा। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को खुद…
बिहार के बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों के हजारों पद खाली होने का मामला मंगलवार को विधानसभा में जोर-शोर से उठा। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने शिक्षा विभाग को सख्त निर्देश दिया कि इन स्कूलों में शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया हर हाल में एक महीने के भीतर पूरी की जाए।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान पूर्व मंत्री और विधायक श्याम रजक ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि इन आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों के स्वीकृत पदों में से करीब 62 फीसदी खाली पड़े हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। उनके अनुसार, कुल 3,456 स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 1,305 शिक्षक ही कार्यरत हैं, जबकि 2,151 पद रिक्त हैं।
खाली पदों पर सरकार और विधायक के अलग-अलग आँकड़े
श्याम रजक के सवाल पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री लखींद्र राम ने जवाब दिया, लेकिन उनके आँकड़े विधायक के आँकड़ों से अलग थे। मंत्री ने कहा कि विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, कुल स्वीकृत पद 2,406 हैं, जिनमें से 1,290 शिक्षक काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 20 संगीत शिक्षक भी नियुक्त हैं और बाकी खाली पदों के लिए बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) को सूचना भेजी जा चुकी है।
हालांकि, श्याम रजक मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए, जिसके बाद सदन में बहस बढ़ गई। इसी समय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खड़े होकर कहा कि सदस्य की चिंता बिल्कुल जायज है। उन्होंने शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस बहाली प्रक्रिया की विशेष निगरानी करने और बिना किसी देरी के इसे तय समय में पूरा कराने का स्पष्ट आदेश दिया।
शिक्षकों के ड्रेस कोड और बिना भवन वाले स्कूलों पर भी चर्चा
सदन में शिक्षा से जुड़े अन्य मुद्दे भी उठे। शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड के सवाल पर सरकार ने बताया कि सरकारी स्कूलों में पहले से ही फॉर्मल ड्रेस कोड लागू है। इसे प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए 20 जुलाई को सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।
वहीं, राज्य में बिना भवन के चल रहे स्कूलों को लेकर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई भी स्कूल बिना भवन के न चले। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन स्कूलों के पास अपनी जमीन या पर्याप्त कमरे नहीं हैं, उनकी सूची एक हफ्ते में तैयार कर ली जाएगी ताकि उनके लिए बुनियादी ढाँचा विकसित करने की दिशा में कार्रवाई की जा सके।
इनपुट: IANS



