पूर्वी चंपारण: जितिया पर्व पर मातम में बदली खुशियाँ, तालाब में डूबने से चार बच्चियों की दर्दनाक मौत
बिहार के पूर्वी चंपारण में जितिया पर्व का उल्लास उस वक्त मातम में बदल गया, जब एक तालाब में डूबने से चार बच्चियों की जान चली गई। यह दर्दनाक हादसा शुक्रवार को पहाड़पुर थाना क्षेत्र के बनकट गांव में…
बिहार के पूर्वी चंपारण में जितिया पर्व का उल्लास उस वक्त मातम में बदल गया, जब एक तालाब में डूबने से चार बच्चियों की जान चली गई। यह दर्दनाक हादसा शुक्रवार को पहाड़पुर थाना क्षेत्र के बनकट गांव में हुआ, जहाँ पर्व के स्नान के दौरान बच्चियाँ गहरे पानी में चली गईं। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जितिया पर्व के मौके पर गांव की कई महिलाएँ और बच्चे पूजा-अर्चना के तहत स्थानीय तालाब में स्नान करने गए थे। इसी दौरान चार बच्चियाँ नहाते हुए अनजाने में तालाब के गहरे हिस्से में पहुँच गईं और डूबने लगीं। जब वे काफी देर तक पानी से बाहर नहीं आईं, तो लोगों ने शोर मचाया, जिसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें खोजना शुरू किया।
तालाब से अस्पताल तक, नाकाम रहीं कोशिशें
स्थानीय लोगों ने तुरंत हिम्मत दिखाते हुए चारों बच्चियों को पानी से बाहर निकाला। उन्हें फौरन पास के पहाड़पुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने वहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हादसे ने पर्व की खुशियों को एक झटके में गमगीन माहौल में बदल दिया।
मृतकों की पहचान प्रमोद महतो की दो बेटियों, 13 वर्षीय सोनामती और 10 वर्षीय फूलमती, वीरेंद्र महतो की 10 वर्षीय बेटी सोनाली कुमारी और अच्छेलाल पासवान की 12 वर्षीय बेटी प्रतिमा कुमारी के रूप में हुई है।
प्रशासन की कार्रवाई और ग्रामीणों की मांग
घटना की सूचना मिलते ही पहाड़पुर थाने की पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने परिजनों और स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाने के बाद चारों शवों को पोस्टमार्टम के लिए मोतिहारी भेज दिया है और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। वहीं, पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इस हादसे के बाद, ग्रामीणों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तालाब के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है। उनकी मांग है कि गहरे और खतरनाक हिस्सों के पास चेतावनी बोर्ड लगाए जाएँ और बैरिकेडिंग की जाए ताकि कोई और परिवार इस तरह का दुख न झेले।
इनपुट: IANS



