बुधवार, 12 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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बिहार में भूमिहीनों को मिलेगी जमीन, 15 अगस्त से 30,000 परिवारों को बासगीत पर्चा देने का अभियान

बिहार सरकार राज्य में भूमि विवादों को खत्म करने और भूमिहीनों को जमीन मुहैया कराने की दिशा में बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में, स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त से राज्य भर में करीब 30 हजार भूमिहीन…

बिहार में भूमिहीनों को मिलेगी जमीन, 15 अगस्त से 30,000 परिवारों को बासगीत पर्चा देने का अभियान
(फोटो: IANS)

बिहार सरकार राज्य में भूमि विवादों को खत्म करने और भूमिहीनों को जमीन मुहैया कराने की दिशा में बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में, स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त से राज्य भर में करीब 30 हजार भूमिहीन परिवारों को बासगीत पर्चा (जमीन का पर्चा) बांटने का एक विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह जानकारी बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने बुधवार को दी।

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पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में 'सहयोग कार्यक्रम' के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री जायसवाल ने कहा कि यह अभियान लगभग एक महीने तक चलेगा। उन्होंने दावा किया कि एक साथ इतनी बड़ी संख्या में भूमिहीन लोगों को पर्चा उपलब्ध कराने की यह देश में पहली पहल है। इस कदम से न केवल भूमिहीन गरीब परिवारों को अपनी जमीन मिलेगी, बल्कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने में भी मदद मिलेगी।

भूमि विवादों पर सरकार का फोकस

दिलीप जायसवाल ने इस बात पर जोर दिया कि बिहार में थानों और सिविल अदालतों में दर्ज होने वाले 35 से 43 प्रतिशत मामले सीधे तौर पर जमीन विवाद से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता भूमि सर्वेक्षण के काम को जल्द से जल्द पूरा करना है, क्योंकि सर्वे अधूरा होने के कारण ही ज्यादातर विवाद पैदा होते हैं। मंत्री ने उम्मीद जताई कि सर्वेक्षण का काम पूरा हो जाने के बाद राज्य में लगभग 90 प्रतिशत भूमि विवाद खत्म हो जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि 15 अगस्त को कुछ जिलों में सर्वे पूरा होने की घोषणा करने का प्रयास किया जा रहा है।

न्यायिक प्रक्रिया में भी तेजी

भूमि विवादों के शीघ्र निपटारे के लिए सरकार ने कई प्रशासनिक और न्यायिक कदम उठाए हैं। मंत्री ने बताया कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुआवजे की शिकायतों के समाधान के लिए राज्य के नौ प्रमंडलों में लैंड एक्विजिशन कोर्ट स्थापित किए गए हैं, जिनमें उच्च न्यायालय की सिफारिश पर सेवानिवृत्त जिला जजों को पीठासीन पदाधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, बिहार भूमि न्यायाधिकरण (BALT) में भी सदस्यों की संख्या पांच से बढ़ाकर सात कर दी गई है, ताकि मामलों का तेजी से निष्पादन हो सके।

इनपुट: IANS

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News4Social बिहार डेस्क

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