बुधवार, 12 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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बिहार शराबबंदी: NCAER की रिपोर्ट ने छेड़ी नई बहस, क्या नीतीश सरकार की नीति बदलेगी?

बिहार में करीब एक दशक से लागू पूर्ण शराबबंदी की नीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। देश के एक प्रतिष्ठित आर्थिक शोध संस्थान की रिपोर्ट ने इस मुद्दे पर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है…

बिहार शराबबंदी: NCAER की रिपोर्ट ने छेड़ी नई बहस, क्या नीतीश सरकार की नीति बदलेगी?
(फोटो: IANS)

बिहार में करीब एक दशक से लागू पूर्ण शराबबंदी की नीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। देश के एक प्रतिष्ठित आर्थिक शोध संस्थान की रिपोर्ट ने इस मुद्दे पर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है, जिसमें शराब की नियंत्रित बिक्री से राज्य के राजस्व में भारी बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) ने अपने अध्ययन में बिहार सरकार को शराबबंदी खत्म कर नियंत्रित बिक्री शुरू करने की सिफारिश की है।

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NCAER की स्टडी के मुताबिक, अगर राज्य में आबकारी कर व्यवस्था बहाल की जाती है तो बिहार के अपने राजस्व में करीब 14 से 15 फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है। इस रिपोर्ट में शराबबंदी के बाद पनपी अवैध तस्करी, दूसरे नशीले पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल और कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने में आ रही चुनौतियों का भी जिक्र किया गया है।

नीति पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार इस नीति पर पुनर्विचार करेगी। हालांकि, सत्तारूढ़ गठबंधन में इसे लेकर फिलहाल कोई एक राय नहीं दिख रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी JDU ने शराबबंदी की समीक्षा या इसे खत्म करने की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया है, क्योंकि यह उनकी राजनीतिक विरासत और सामाजिक सुधार के एजेंडे का एक अहम हिस्सा रही है।

भाजपा प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा है कि ऐसी शोध रिपोर्टें समय-समय पर आती रहती हैं और सरकार सभी विषयों पर विचार करती है। उन्होंने याद दिलाया कि 2016 में शराबबंदी का फैसला सामूहिक था और लगभग सभी दलों ने इसका समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि समय-समय पर इसकी समीक्षा होती है और इस नई रिपोर्ट की भी समीक्षा की जाएगी, लेकिन आगे का कोई भी निर्णय कैबिनेट का सामूहिक फैसला होगा।

विपक्ष और अन्य दलों के सवाल

राज्य में विपक्ष और सरकार के सहयोगी भी इस नीति पर सवाल उठाते रहे हैं। केंद्रीय मंत्री और 'हम' प्रमुख जीतन राम मांझी ने गुजरात की तर्ज पर बिहार में शराबबंदी कानून लागू करने की वकालत की है। वहीं, राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कानून बिना किसी सर्वे के लागू किया गया था। उन्होंने नेपाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ से हो रही शराब की तस्करी रोकने के लिए गंभीर कार्रवाई की मांग की और अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अप्रैल 2016 में महिलाओं की मांग और सामाजिक सुधार का हवाला देते हुए राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी, जो उनकी सरकार की एक प्रमुख पहचान बन गई। NCAER की इस रिपोर्ट ने अब आर्थिक लाभ, सामाजिक प्रभाव और राजनीतिक प्रतिबद्धता के बीच एक नई बहस छेड़ दी है, जिस पर सरकार के अगले कदम का इंतजार रहेगा।

इनपुट: IANS

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News4Social बिहार डेस्क

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