छत्तीसगढ़ हिरासत में मौत: सुप्रीम कोर्ट ने CBI को सौंपी जांच, राज्य पुलिस की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में पुलिस हिरासत में हुई एक युवक की मौत के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। अदालत ने राज्य पुलिस की कार्रवाई और मामले में हुई देरी पर गंभीर सवाल उठाए…
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में पुलिस हिरासत में हुई एक युवक की मौत के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। अदालत ने राज्य पुलिस की कार्रवाई और मामले में हुई देरी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार को पीड़ित परिवार को तत्काल 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
यह मामला बिलासपुर जिले के 34 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी की मौत से जुड़ा है, जिनकी मृत्यु जनवरी 2024 में पुलिस हिरासत में हुई थी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले में राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरी चिंता व्यक्त की।
मामले का पूरा घटनाक्रम
मामले की शुरुआत 18 जनवरी 2024 को हुई, जब बिलासपुर जिले के सीपत थाने की पुलिस ने श्रवण सूर्यवंशी को अवैध शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें बिलासपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। 21 जनवरी को उनकी तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें CIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ 22 जनवरी 2024 को उनकी मृत्यु हो गई।
न्यायिक जांच और पुलिस की देरी
इस मौत के बाद हुई एक न्यायिक जांच में यह बात सामने आई कि श्रवण की मौत सिर में लगी चोट के कारण हुई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इस साल जनवरी में हुई मौत के मामले में पुलिस ने FIR दर्ज करने में महीनों की देरी की और 30 जुलाई 2026 को FIR दर्ज की। सुप्रीम कोर्ट ने CBI को उन पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करने का निर्देश दिया है, जिन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट आने के बावजूद उचित कार्रवाई नहीं की।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
श्रवण की पत्नी और बेटियों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर हिरासत में मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी। अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 1 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था और पुलिसकर्मियों को लापरवाही का जिम्मेदार माना था। इस फैसले के खिलाफ परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसने अब मामले को CBI को सौंपते हुए 13 अक्टूबर तक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
इनपुट: IANS



